यूपी के सहारनपुर के दो दोस्त मोहम्मद कासिफ और मोहम्मद आदिल ने किस्को के नवाडीह बस्ती में दिखाया रोमांचक प्रदर्शन, लोगों ने जमकर की सराहना
किस्को/लोहरदगाः कहते हैं कि पेट की आग इंसान से बड़े से बड़ा संघर्ष करवा देती है। इसी संघर्ष और जुनून की मिसाल पेश कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रहने वाले दो दोस्त मोहम्मद कासिफ और मोहम्मद आदिल, जिन्होंने अपनी हैरतअंगेज कला और साहसिक करतबों से झारखंड के लोहरदगा जिले के किस्को प्रखंड अंतर्गत नवाडीह बस्ती के लोगों को पूरे एक सप्ताह तक रोमांचित कर दिया।
पिछले सात दिनों से दोनों कलाकारों ने प्रतिदिन अलग-अलग जोखिम भरे करतब प्रस्तुत किए। उनके प्रदर्शन को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कलाकारों के साहस, संतुलन और आत्मविश्वास ने दर्शकों को न केवल रोमांचित किया, बल्कि उनकी मेहनत और संघर्ष की कहानी ने लोगों को भावुक भी कर दिया।
कार्यक्रम के अंतिम दिन सबसे रोमांचक प्रदर्शन देखने को मिला। मोहम्मद कासिफ ने अपने साथी और दोस्त मोहम्मद आदिल को लगभग पांच फीट गहरे गड्ढे में दफन कर दिया। करीब दस घंटे तक गड्ढे के अंदर रहने के बाद पूर्व निर्धारित समय पर लोगों की मौजूदगी में उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। कलाकार को सकुशल बाहर निकलते देख मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ दोनों दोस्तों का उत्साहवर्धन किया।
दोनों कलाकारों ने बताया कि आर्थिक तंगी और परिवार का पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी ने उन्हें इस कठिन और जोखिम भरे पेशे को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यही कला उनके जीवनयापन का मुख्य साधन है और वे पिछले लगभग 15 वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों में अपनी प्रस्तुति देते आ रहे हैं।
कलाकारों के अनुसार वे पिछले 13 वर्षों से झारखंड के सभी 24 जिलों में लगातार प्रदर्शन कर चुके हैं। इसके अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र (मुंबई), गोवा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात सहित देश के अनेक राज्यों में भी अपनी कला का प्रदर्शन कर लोगों का मनोरंजन कर चुके हैं।
मोहम्मद कासिफ और मोहम्मद आदिल के प्रमुख करतबों में दांतों से ट्रैक्टर खींचना, ब्लेड कटिंग, कई दिनों तक कब्र में रहना, एक सप्ताह तक लगातार साइकिल पर रहना और उसी पर सोना, सीने पर ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल चलवाना, सीने पर पत्थर तुड़वाना, आग की लपटों के बीच चलना, शरीर पर बल्ब फोड़ना, लाल-गर्म सरिया को जीभ से स्पर्श करना तथा शरीर पर रखी ईंटों को तुड़वाना जैसे अनेक रोमांचकारी प्रदर्शन शामिल हैं।
हालांकि ऐसे करतब अत्यंत जोखिमपूर्ण होते हैं और इनमें जान का खतरा भी बना रहता है। इसलिए विशेषज्ञों की निगरानी और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बिना इस प्रकार के प्रदर्शनों की नकल करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
इस बीच नवाडीह बस्ती के लोगों ने दोनों कलाकारों की प्रतिभा और साहस की सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद वे अपनी कला के माध्यम से लोगों का मनोरंजन करने के साथ-साथ संघर्ष और मेहनत का संदेश भी दे रहे हैं। लोगों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनके प्रदर्शन की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

