जमशेदपुर। टाटा पावर ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के साथ मुंबई रिफाइनरी में 110 केवी बिजली आपूर्ति अवसंरचना विकसित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। इस संबंध में मंगलवार को टाटा स्टील द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस परियोजना के तहत बीपीसीएल की रिफाइनरी में स्थापित होने वाली पेट्रोलियम अवशेष द्रवित उत्प्रेरक विखंडन इकाई की 90 मेगावाट बिजली की आवश्यकता पूरी की जाएगी। इस समझौते से मुंबई के औद्योगिक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति और संचरण व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
बीपीसीएल की यह परियोजना भारतीय तेल शोधन क्षेत्र की महत्वपूर्ण पहल है। देश में पहली बार इस तरह की परियोजना को कार्यान्वित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम उत्पादों से अधिक मूल्यवान उत्पाद प्राप्त करना और पेट्रोरसायन क्षेत्र में कंपनी की गतिविधियों का विस्तार करना है। इस इकाई की प्रसंस्करण क्षमता 30 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष होगी। परियोजना पर लगभग 14,203 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह बीपीसीएल की वर्तमान में निर्माणाधीन दूसरी सबसे बड़ी परियोजना है। साथ ही, मुंबई रिफाइनरी में अब तक शुरू की गई यह सबसे बड़ी परियोजना है। इससे देश में मूल्य संवर्धन बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
समझौते के अनुसार, टाटा पावर 110 केवी बिजली कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के साथ इससे संबंधित बिजली अवसंरचना की रूपरेखा तैयार करने और उसके विकास का कार्य करेगी। इस पूरी व्यवस्था के विकास पर टाटा पावर और बीपीसीएल की ओर से संयुक्त रूप से लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। आवश्यक मंजूरियों और परियोजना के निर्धारित लक्ष्यों के आधार पर इस कार्य को लगभग 24 महीने में पूरा करने की योजना है।
इस परियोजना से बीपीसीएल की तत्काल बिजली जरूरत पूरी होने के साथ मुंबई के ट्रॉम्बे क्षेत्र में टाटा पावर की बिजली संचरण व्यवस्था भी मजबूत होगी। इससे क्षेत्र के बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं और बिजली की अधिक खपत वाली अन्य परियोजनाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
इसके अलावा, टाटा पावर ने मुंबई में बिजली आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए अगले पांच वर्षों में ट्रॉम्बे क्षेत्र में 400 केवी की बिजली संचरण सुविधा विकसित करने की योजना बनाई है। इससे बिजली संचरण की क्षमता बढ़ेगी और मुंबई के औद्योगिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस सहयोग को मुंबई की ऊर्जा अवसंरचना मजबूत करने, देश की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

