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केएसएमएस की प्रिंसिपल और टीम ने विसर्जन के बाद चलाया नदी तट सफाई अभियान, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

जमशेदपुर: केरला समाजम मॉडल स्कूल (केएसएमएस) की प्रिंसिपल रिना बनर्जी के नेतृत्व में स्कूल की टीम ने 25 अक्टूबर 2026 को डोमुहानी घाट पर आयोजित नदी तट सफाई अभियान में हिस्सा लिया। स्वर्णरेखा और खरकई नदियों के संगम स्थल पर आयोजित इस अभियान का उद्देश्य मूर्ति विसर्जन के बाद नदी किनारे फैले कचरे और पूजा सामग्री के अवशेषों को हटाकर जलस्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।

इस अभियान का आयोजन रोटरी क्लब ऑफ जमशेदपुर फेमिना, टाटा मेन हॉस्पिटल की मेडिकल टीम, आर्ट ऑफ लिविंग टीम, लायंस क्लब और स्वच्छता पुकारे फाउंडेशन की पर्यावरण टीम के सहयोग से किया गया। विभिन्न संगठनों के सदस्यों और स्वयंसेवकों ने मिलकर नदी तट की सफाई की और स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।

अभियान में केएसएमएस की ओर से प्रिंसिपल रिना बनर्जी, रजिस्ट्रार वृंदा सुरेश, काउंसलर निशि ठाकुर, एनवायरनमेंट क्लब की मॉडरेटर शीला सुधाकरन, गाइड्स कैप्टन सुधा वर्मा, शिक्षक निहाल सिंह और दीप नायर सहित विद्यार्थियों ने भाग लिया। यह पहल स्कूल के चेयरमैन टी. के. सुकुमारन के मार्गदर्शन में की गई।

विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की पहल

अभियान के दौरान केएसएमएस की टीम ने अन्य संगठनों के स्वयंसेवकों के साथ मिलकर नदी किनारे सफाई कार्य में सक्रिय योगदान दिया। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि पर्यावरण संरक्षण केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे दैनिक जीवन में अपनाना भी जरूरी है।

स्कूल प्रबंधन का मानना है कि स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण के निर्माण के लिए कचरे का उचित निपटान, जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाना और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे अभियानों से विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है और वे पर्यावरण के प्रति अपने कर्तव्यों को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं।

केएसएमएस की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति स्कूल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। स्कूल का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव देना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना है। नदी तट की सफाई जैसे प्रयासों के जरिए विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि छोटे-छोटे व्यक्तिगत प्रयास भी सामूहिक भागीदारी से बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं।

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