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कोल्हान विवि का सातवां दीक्षांत समारोह, 224 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, बेटियों ने जीते 15 स्वर्ण पदक

चाईबासा। कोल्हान विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह का आयोजन मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर स्थित सभागार में हुआ। झारखंड के राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने समारोह का उद्घाटन किया। विश्वविद्यालय पहुंचने पर कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने पुष्पगुच्छ देकर राज्यपाल का स्वागत किया। इसके बाद विधिवत रूप से दीक्षांत समारोह की शुरुआत हुई। समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों के कुल 224 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 39 पीएचडी, 132 स्नातकोत्तर, 17 पीजी मेडिकल डिप्लोमा और 10 एमएड की उपाधियां शामिल हैं।

दीक्षांत समारोह में इस बार भी छात्राओं ने अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों से अलग पहचान बनाई। कुल 26 स्वर्ण पदकों में 15 छात्राओं और 11 छात्रों ने स्थान हासिल किया। राज्यपाल ने उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री हासिल करने का अवसर नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने तथा उन्हें निभाने का संकल्प लेने का भी अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग समाज के विकास के लिए करने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र में स्थित कोल्हान विश्वविद्यालय की अपनी विशिष्ट पहचान है। कोल्हान क्षेत्र सांस्कृतिक और जनजातीय विविधता से समृद्ध है। ऐसे में आधुनिक शिक्षा के साथ स्थानीय जनजातीय भाषाओं, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण तथा विकास पर भी विश्वविद्यालय को विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार हासिल करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास और समाज के लिए उपयोगी बनना भी है।

महिला शिक्षा पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय की यह उल्लेखनीय विशेषता है कि यहां छात्राओं की संख्या छात्रों की तुलना में अधिक है। एक बेटी की शिक्षा का प्रभाव केवल उसके जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार और आने वाली पीढ़ियां उससे प्रभावित होती हैं। ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ छात्रावास, छात्रवृत्ति और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण को मजबूत करना आवश्यक है।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र नियमित रखने और परीक्षाएं समय पर आयोजित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का समय और उनका भविष्य विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालय के केंद्र में विद्यार्थी होने चाहिए और उनकी समस्याओं का समय पर समाधान होना चाहिए। इससे विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय के बीच विश्वास और मजबूत होगा।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से नए अवसर सामने आ रहे हैं। विद्यार्थियों को बदलती तकनीक के अनुरूप अपने ज्ञान और कौशल को विकसित करना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें अपने आसपास की सामाजिक और स्थानीय समस्याओं को समझकर उनके व्यावहारिक समाधान तलाशने की दिशा में भी काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय समस्याओं के समाधान की सोच विद्यार्थियों को समाज से जोड़ती है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं के ज्ञान, कौशल, नवाचार और जिम्मेदारी की अहम भूमिका होगी।

विश्वविद्यालय की ओर से जारी उपलब्धियों के अनुसार बीएड सत्र 2023-25 में इशरत परवीन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि एमएड सत्र 2023-25 में सुभद्रा लागुरी और एमबीए सत्र 2022-24 में नीलम परवीन ने प्रथम स्थान हासिल किया। स्नातकोत्तर के विभिन्न विषयों में भी विद्यार्थियों ने बेहतर प्रदर्शन किया। एंथ्रोपोलॉजी में जुरा बारीबांग्ला और लक्ष्मीमोनी मुर्मू, बॉटनी में ज्योत्स्ना रानी जेना, केमिस्ट्री में कृति दीपा मोहंता, कॉमर्स में अमिला सिंकू, इकोनॉमिक्स में बिमल बारजो, अंग्रेजी में प्रियंका महतो, भूगोल में शुभदीप हलदर, हिंदी में संजय सोलोमन, इतिहास में वर्षा साथुआ, होम साइंस में गुरुमनी सरदार, हो में मादे कोराह, कुड़माली में बालकिशोर महतो, गणित में सरोज कुमार आदित्य, उड़िया में सस्मिता गिरी, दर्शनशास्त्र में शिवा पूर्ति, राजनीति विज्ञान में सागर कुमार, फिजिक्स में लाल मुर्मू, मनोविज्ञान में आरती कुमारी, संस्कृत में रूपा सिंह मुंडा, संताली में गौरांग मुर्मू, उर्दू में मो. मिन्हाज आलम और जूलॉजी में वजीहा खुर्शीद ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

समारोह को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सभागार के भीतर मोबाइल फोन, बैग और किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया था। उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का सभागार में प्रवेश सुबह से ही शुरू हो गया था। समारोह के दौरान कुलपति द्वारा विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी जड़ों और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े रहते हुए आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उनकी पहचान केवल शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनके योगदान से भी बननी चाहिए। उन्होंने कोल्हान, झारखंड और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए सभी उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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