जमशेदपुर : पर्यावरण संरक्षण को लेकर नई पीढ़ी को जागरूक करने और समाज में सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देने के उद्देश्य से केरला समाजम मॉडल स्कूल (KSMS), गोलमुरी के एनवायरनमेंट क्लब की ओर से सोनारी के वेस्ट लेआउट स्थित 35I, एफ रोड में मियावाकी प्लांटेशन ड्राइव का आयोजन किया गया। इस अभियान की खासियत यह रही कि इसे ‘थ्री जनरेशन प्लांटेशन’ की अवधारणा पर आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों के साथ उनके माता-पिता, दादा-दादी और समुदाय के सदस्यों ने मिलकर पौधारोपण किया।
कार्यक्रम में टाटा स्टील यूआईएसएल के एमडी अतुल भटनागर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने तीन पीढ़ियों को एक साथ जोड़कर पौधारोपण की इस पहल की सराहना की और स्कूल के प्रयास को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सार्थक कदम बताया। उन्होंने विद्यार्थियों और उपस्थित अतिथियों की ओर से पेड़ों को इको-फ्रेंडली राखियां बांधने की पहल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह गतिविधि इंसान और प्रकृति के बीच संबंध को दर्शाने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करती है।
अभियान के दौरान कुल 500 पौधे लगाए गए। विद्यार्थियों ने इन पौधों और पेड़ों को इको-फ्रेंडली राखियां बांधकर प्रकृति के साथ अपने जुड़ाव का प्रतीकात्मक संदेश दिया। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके संरक्षण और नियमित देखभाल की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
आयोजकों के अनुसार, लगाए गए सभी 500 पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि वे लंबे समय तक जीवित रह सकें और भविष्य में हरित क्षेत्र के विकास में योगदान दें। इस तरह पौधारोपण अभियान को केवल एक दिन के कार्यक्रम के बजाय दीर्घकालिक पर्यावरणीय पहल का रूप दिया गया।
कार्यक्रम में केरला समाजम के चेयरमैन सुकुमारन, अध्यक्ष के. मुरलीधरन, स्कूल की प्रिंसिपल रीना बनर्जी, रजिस्ट्रार वृंदा सुरेश तथा एनवायरनमेंट क्लब की मॉडरेटर शीला सुधाकरन और दीप्ति चक्रवर्ती मौजूद रहीं। अभियान में केएसएमएस के विद्यार्थियों के अलावा केएसएचएस के विद्यार्थी, अभिभावक, दादा-दादी और समुदाय के सदस्यों ने भी भाग लिया।
‘थ्री जनरेशन प्लांटेशन’ के माध्यम से कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब तीन पीढ़ियां एक साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी उठाती हैं, तो वे केवल पौधे नहीं लगातीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सतत विकास और हरित भविष्य की विरासत भी तैयार करती हैं।

