जमशेदपुर। आरक्षण व्यवस्था में संशोधन और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की प्रस्तावित गाइडलाइन को वापस लेने की मांग को लेकर परशुराम शक्ति सेना एवं सवर्ण सेना ने शनिवार को विरोध जताया। संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष अभिषेक पांडेय के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री और पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपकर शिक्षा एवं रोजगार के क्षेत्र में योग्यता आधारित व्यवस्था लागू करने की मांग की।
संगठन की ओर से कहा गया कि UGC की प्रस्तावित गाइडलाइन को लेकर विद्यार्थियों और युवाओं के बीच कई तरह की चिंताएं हैं। परशुराम शक्ति सेना का आरोप है कि प्रस्तावित प्रावधानों से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भेदभाव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। संगठन ने केंद्र सरकार से इस गाइडलाइन पर पुनर्विचार करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
आरक्षण व्यवस्था को लेकर संगठन ने कहा कि वर्तमान जाति आधारित व्यवस्था की व्यापक समीक्षा किए जाने की जरूरत है। संगठन का दावा है कि प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों और युवाओं को कई स्तरों पर अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। इसके कारण सामान्य वर्ग के युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। संगठन ने आर्थिक रूप से कमजोर सभी वर्गों के लोगों को समान अवसर उपलब्ध कराने की मांग की।
ज्ञापन में शिक्षा और रोजगार में योग्यता को प्राथमिक आधार बनाने, आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने तथा सामाजिक न्याय के नाम पर किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं करने की मांग उठाई गई। संगठन ने कहा कि उसकी लड़ाई संविधान के दायरे में लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों और मांगों को लेकर है।
इस दौरान संगठन की ओर से एक दिवसीय उपवास का भी आयोजन किया गया। अभिषेक पांडेय ने कहा कि आरक्षण नीति में संशोधन और UGC की प्रस्तावित गाइडलाइन को वापस लेने की मांग को लेकर संगठन आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को आगे बढ़ाने पर निर्णय लिया जाएगा।

