आर्थिक असमानता, धन के केंद्रीकरण और वैकल्पिक आर्थिक व्यवस्था पर उनके विचारों ने विश्वभर में बनाई अलग पहचान
जमशेदपुर: आनंद मार्ग के एक सदस्य 83 वर्ष के प्रख्यात भारतीय-अमेरिकी अर्थशास्त्री, लेखक और शिक्षाविद् प्रो. रवि बत्रा के निधन पर जमशेदपुर आनंद मार्ग परिवार ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। डॉक्टर प्रोफेसर रवि बत्रा डलास, टेक्सास, अमेरिका में उनका निधन हुआ। वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे ।
अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अपने स्वतंत्र एवं मुखर विचारों तथा लोकप्रिय पुस्तकों के माध्यम से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
प्रो. बत्रा अमेरिका के डलास स्थित सदर्न मेथोडिस्ट यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे। आर्थिक असमानता, संपत्ति के केंद्रीकरण, आर्थिक संकट, वित्तीय व्यवस्था तथा अधिक न्यायपूर्ण आर्थिक व्यवस्था की आवश्यकता उनके अध्ययन और लेखन के प्रमुख विषय रहे।
एक लेखक के रूप में भी प्रो. बत्रा को व्यापक लोकप्रियता मिली। उनकी चर्चित पुस्तक ‘द ग्रेट डिप्रेशन ऑफ 1990’ ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई। इसके अलावा ‘द डाउनफॉल ऑफ कैपिटलिज्म एंड कम्युनिज्म’ सहित उनकी कई पुस्तकों में उन्होंने पूंजीवाद और साम्यवाद की आर्थिक व्यवस्थाओं की कमियों का विश्लेषण करते हुए वैकल्पिक आर्थिक चिंतन की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रउत के अध्ययन और प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान
प्रो. रवि बत्रा का बौद्धिक जीवन उनके आध्यात्मिक गुरु श्री श्री आनंदमूर्तिजी के सामाजिक एवं आर्थिक विचारों से भी गहराई से प्रभावित रहा। वे प्रउत, अर्थात प्रोग्रेसिव यूटिलाइजेशन थ्योरी, के प्रमुख व्याख्याताओं में शामिल रहे।
उन्होंने प्रउत के आर्थिक एवं सामाजिक सिद्धांतों का अध्ययन करते हुए उन्हें आधुनिक आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में समझाने और व्यापक समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया। आर्थिक संसाधनों का न्यायपूर्ण उपयोग, धन के अत्यधिक केंद्रीकरण पर नियंत्रण तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति जैसे विषय उनके चिंतन के महत्वपूर्ण हिस्से रहे।
प्रो. बत्रा का मानना था कि आर्थिक व्यवस्था का उद्देश्य केवल उत्पादन और संपत्ति में वृद्धि नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका अंतिम लक्ष्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में आर्थिक सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना होना चाहिए।
स्वतंत्र और निर्भीक आर्थिक चिंतन के लिए रहेंगे याद
प्रो. बत्रा ने अपने लेखन के माध्यम से प्रचलित आर्थिक नीतियों और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए तथा आर्थिक संकटों के कारणों पर स्वतंत्र दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उनके विचारों ने अर्थशास्त्र के क्षेत्र में व्यापक बहस को जन्म दिया और बड़ी संख्या में पाठकों को आर्थिक व्यवस्था के मूल स्वरूप पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।
आनंद मार्ग परिवार ने कहा कि प्रो. रवि बत्रा का निधन अर्थशास्त्र, सामाजिक-आर्थिक चिंतन और प्रउत के अध्ययन के क्षेत्र के लिए एक बड़ी क्षति है। वे एक प्रखर अर्थशास्त्री, लोकप्रिय लेखक, समर्पित प्राउटिस्ट और निष्ठावान आध्यात्मिक साधक के रूप में लंबे समय तक स्मरण किए जाएंगे।
परिवार की ओर से कहा गया कि उनका विद्वतापूर्ण योगदान, स्वतंत्र चिंतन और अधिक न्यायपूर्ण एवं मानवीय समाज के निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।
आनंद मार्ग परिवार ने प्रो. रवि बत्रा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन और कार्य मानवता के कल्याण तथा सामाजिक-आर्थिक प्रगति के लिए प्रयासरत लोगों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

