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75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार की मांग पर सारंडा में आर-पार का आंदोलन, सैकड़ों ग्रामीणों ने घेरा गुवा खदान

गुवा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा क्षेत्र में स्थानीय रोजगार और पूर्व में हुए लिखित समझौते को लागू कराने की मांग को लेकर सोमवार, 10 अगस्त की सुबह से सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले ग्रामीणों ने सेल की गुवा खदान में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया। आंदोलन के दौरान सारंडा के विभिन्न गांवों से पहुंचे सैकड़ों मुंडा, ग्रामीण और बेरोजगार युवा पारंपरिक हथियारों के साथ रांजाबुरु खदान क्षेत्र में जुटे। आंदोलनकारियों ने खदान के गेट से लेकर स्क्रीनिंग प्लांट और अन्य संचालन क्षेत्रों में पहुंचकर उत्पादन तथा माल ढुलाई को बाधित कर दिया।

आंदोलन का नेतृत्व मानकी लागुड़ा देवगम और गंगदा पंचायत के मुखिया राजू सांडिल कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में प्रशासन, सेल प्रबंधन, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता में स्थानीय रोजगार समेत कई मांगों पर लिखित सहमति बनी थी, लेकिन लंबे समय बाद भी उसका पूर्ण क्रियान्वयन नहीं हुआ। इसी को लेकर ग्रामीणों ने इस बार मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग खदान प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने और 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की है। ग्रामीणों के अनुसार जल छिड़काव, रैक लोडिंग, ट्रांसपोर्टिंग समेत अन्य कार्यों में भी स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर सहमति बनी थी। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण और कारो नदी की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग भी शामिल है।

मुखिया राजू सांडिल ने कहा कि स्थानीय ग्रामीण खनन से होने वाले धूल और प्रदूषण का असर झेलते हैं, लेकिन रोजगार के अवसर बाहरी लोगों को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक मां सरला ठेका कंपनी के मालिक मंटू मिश्रा आंदोलन स्थल पर पहुंचकर मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेते, आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मां सरला कंपनी में चालक, खलासी और अन्य कार्यों में बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आंदोलन में मुंडा बुधराम सिद्धू, राजेश टोपनो, जानुम सिंह चेरोवा, झामुमो नेता बृंदावन गोप, प्रीतम गोच्छाईत, राजू गोप और श्रीधर गोप समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। फिलहाल खदान में उत्पादन और लौह अयस्क डिस्पैच प्रभावित होने से सेल प्रबंधन के सामने स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

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