जमशेदपुर: बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव और परीक्षा से जुड़ी चिंता के बीच बाल्डविन फार्म एरिया हाई स्कूल, कदमा में अभिभावकों के लिए पैरेंटिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यशाला में अभिभावकों को बच्चों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने, परीक्षा के दौरान उनके तनाव को समझने और घर में सकारात्मक एवं सहयोगी माहौल बनाए रखने को लेकर व्यावहारिक सुझाव दिए गए।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मोटिवेशनल स्पीकर, प्रमाणित राजाधिराज योग प्रशिक्षक और समग्र जीवनशैली विशेषज्ञ राजेन्द्र देव थे। पूर्व केमिकल इंजीनियर राजेन्द्र देव सेवानिवृत्ति के बाद योग, ध्यान, आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों के माध्यम से मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
वर्कशॉप को संबोधित करते हुए राजेन्द्र देव ने कहा कि 12 से 16 वर्ष की उम्र बच्चों के जीवन का संवेदनशील दौर होता है। इस उम्र में होने वाले शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल बदलाव बच्चों को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में पढ़ाई का अत्यधिक दबाव, दूसरे बच्चों से लगातार तुलना और अवास्तविक अपेक्षाएं उनके भीतर तनाव और चिंता को बढ़ा सकती हैं।
उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की तुलना दूसरों से नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि “शर्मा जी के बेटे ने 95 प्रतिशत अंक लाए हैं” जैसी बातें बच्चों के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। इसके बजाय अभिभावकों को बच्चों के प्रयासों की सराहना करनी चाहिए, उनकी क्षमताओं पर भरोसा जताना चाहिए और उन्हें भावनात्मक सुरक्षा एवं निरंतर प्रोत्साहन देना चाहिए। राजेन्द्र देव ने कहा कि हर बच्चा अपनी अलग प्रतिभा और क्षमता लेकर आगे बढ़ता है तथा सकारात्मक माहौल में ही उसका बेहतर विकास संभव है।
कार्यक्रम में अभिभावकों का स्वागत करते हुए निदेशक (अकादमिक) अशोक सिंह ने कहा कि कक्षा 10वीं और 12वीं विद्यार्थियों के जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं, लेकिन इस दौरान अभिभावकों की भूमिका केवल बेहतर अंक हासिल कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बच्चों के आत्मविश्वास को बनाए रखना, उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाना भी अभिभावकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षा निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और खुशहाली उससे अधिक महत्वपूर्ण है। अभिभावकों से बच्चों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने, उनका मनोबल बढ़ाने और परीक्षा की तैयारियों के दौरान हर स्तर पर सहयोग देने की अपील की गई।
वर्कशॉप में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने सत्र को उपयोगी और प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि परीक्षा के दौरान बच्चों के व्यवहार और भावनात्मक जरूरतों को समझने में उन्हें महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
कार्यक्रम के समापन पर उप-प्राचार्या अर्चना बोस ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने विद्यार्थियों के समग्र और संतुलित विकास के लिए विद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस अवसर पर निदेशक (प्रशासन) राजीव रंजन सिन्हा, सचिव प्रभास कुमार, प्राचार्या सुभाश्री सरकार और प्रशासक सचिन कुमार भी मौजूद रहे। विद्यालय प्रबंधन ने अभिभावकों के लिए इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा के दौर में केवल शैक्षणिक उपलब्धियां पर्याप्त नहीं हैं। विद्यार्थियों का मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत होना भी उतना ही जरूरी है।
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, भविष्य में भी अभिभावकों और विद्यार्थियों से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि स्कूल और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके और विद्यार्थियों को आत्मविश्वासी, संवेदनशील तथा मानसिक रूप से स्वस्थ बनाने की दिशा में प्रभावी प्रयास जारी रहें।

