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Wed. Jul 29th, 2026

एक करोड़ का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार, तीन दशक तक रहा सुरक्षाबलों के लिए चुनौती, 141 नक्सली मामलों का आरोपी

रांची। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेताओं में शामिल पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर दा को झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने धनबाद से गिरफ्तार कर लिया है। करीब तीन दशक तक झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जंगलों में सक्रिय रहे मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को देश में माओवादी नेटवर्क के खिलाफ सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था और वह 141 से अधिक नक्सली मामलों में वांछित था। उसके खिलाफ हत्या, विस्फोट, सुरक्षाबलों पर हमले, रंगदारी, लेवी वसूली, अपहरण, आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े अनेक मामले दर्ज हैं।

बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के लक्ष्य की घोषणा के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने शीर्ष माओवादी नेताओं के खिलाफ अभियान तेज कर दिया था। इसी रणनीति के तहत लंबे समय से मिसिर बेसरा की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही थी। उसकी गिरफ्तारी में सीआरपीएफ, झारखंड पुलिस और झारखंड जगुआर की संयुक्त कार्रवाई निर्णायक साबित हुई। अभियान में सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह, आईजी अभियान नरेंद्र सिंह तथा झारखंड जगुआर के आईजी अनूप बिरथरे की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मूल रूप से गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के मदनाडीह गांव निवासी मिसिर बेसरा का जन्म वर्ष 1960 के आसपास हुआ था। उसके पिता स्वर्गीय दर्पण बेसरा और माता रसोमति देवी थीं। उसने राजनीति विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई की थी। हिंदी, संथाली और हो भाषा पर उसकी अच्छी पकड़ थी। छात्र जीवन के दौरान धनबाद के राजगंज में पढ़ाई के समय वह वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ और धीरे-धीरे उग्रवादी गतिविधियों की ओर बढ़ गया। वर्ष 1980 के दशक में उसने घर छोड़कर माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) का दामन थाम लिया और बाद में संगठन का प्रमुख रणनीतिकार बन गया।

वर्ष 1985-86 में सिंदरी में आयोजित एमसीसी सम्मेलन में उसने स्वयंसेवक के रूप में काम किया। इसके बाद वरिष्ठ माओवादी नेता सोवन मरांडी ने उसे संगठन की प्राथमिक सदस्यता दिलाई। 1990 के दशक में प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के संपर्क में आने के बाद उसने झारखंड, दक्षिणी छोटानागपुर और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में संगठन का तेजी से विस्तार किया। वर्ष 2000 में उसने झारखंड रीजनल कमेटी के गठन में अहम भूमिका निभाई और बुंडू क्षेत्र में पहला सशस्त्र दस्ता तैयार किया।

मिसिर बेसरा का नाम वर्ष 2003 और 2004 में पश्चिम सिंहभूम जिले के बिटकिलसोय और बलिबा क्षेत्र में हुए भीषण आईईडी हमलों के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। इन हमलों में एक साथ 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। इन घटनाओं के बाद संगठन में उसका कद काफी बढ़ गया और उसे केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) तथा ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो का नेतृत्व सौंपा गया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इसके बाद उसने कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को नई दिशा दी।

वर्ष 2009 में बिहार के चर्चित लखीसराय कोर्ट जेलब्रेक कांड ने मिसिर बेसरा को फिर सुर्खियों में ला दिया। अदालत में पेशी के दौरान लगभग 30 हथियारबंद माओवादियों ने हमला कर उसे पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया था। बमबारी और फायरिंग के बीच एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी और इसके बाद वह वर्षों तक सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देता रहा।

सारंडा और कोल्हान के घने जंगल लंबे समय तक उसका सबसे सुरक्षित ठिकाना बने रहे। जराईकेला, छोटानागरा, मनोहरपुर, तुम्बाहाका, पाटातोरोप, रेंगड़ाहातु और आंजेदबेड़ा जैसे दुर्गम गांवों में वह लगातार अपना ठिकाना बदलता रहता था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सड़क, पुल और अन्य विकास परियोजनाओं में लगे ठेकेदारों से लेवी वसूली संगठन की आय का सबसे बड़ा स्रोत थी। इसी धन के बल पर संगठन हथियार, विस्फोटक और रसद की व्यवस्था करता था।

हाल के वर्षों में संगठन के भीतर भी उसका प्रभाव चुनौती के दौर से गुजर रहा था। जनवरी 2026 में शीर्ष माओवादी नेता अनल दा के मारे जाने के बाद संगठन में नेतृत्व को लेकर मिसिर बेसरा और पश्चिम बंगाल के एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश के बीच वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई थी। दोनों गुटों के बीच मतभेद के कारण संगठन कमजोर पड़ने लगा और कई कैडर अलग-अलग धड़ों में बंट गए।

मिसिर बेसरा की निजी जिंदगी भी काफी बिखरी हुई रही। युवावस्था में उसकी शादी मोनासी देवी से हुई थी और उनका एक पुत्र सिद्धार्थ है, जो वर्तमान में दिहाड़ी मजदूरी कर जीवनयापन करता है। मिसिर के घर छोड़कर भूमिगत होने के बाद उसकी पहली पत्नी ने दूसरी शादी कर ली। बाद में उसने श्यामा दी से दूसरा विवाह किया। उसका भाई देवी लाल बेसरा पारा शिक्षक है। पैतृक गांव में उसके नाम पर केवल लगभग तीन एकड़ कृषि भूमि और एक खपरैल मकान बताया जाता है।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका है। हालांकि, पश्चिम बंगाल का शीर्ष माओवादी नेता असीम मंडल उर्फ आकाश अभी भी फरार है और उसकी तलाश में झारखंड, पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में संयुक्त अभियान लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में माओवादी संगठन के शेष शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ भी अभियान और तेज किया जाएगा।

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