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एक पहल: सपनों से आगे’ के चौथे वार्षिक समारोह का आयोजन, 200 से अधिक महिला कर्मचारियों का हुआ स्वागत

जमशेदपुर: ऑटोमोबाइल और गैर-ऑटोमोबाइल कंपोनेंट निर्माण क्षेत्र की अग्रणी कंपनी आरएसबी ग्रुप ने अपने प्रमुख महिला सशक्तिकरण अभियान ‘एक पहल’ के चौथे वार्षिक समारोह का आयोजन किया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘एक पहल: सपनों से आगे’ रखी गई, जिसका उद्देश्य महिलाओं को अपने सपनों को वास्तविक उपलब्धियों में बदलने के लिए प्रेरित करना रहा।

समारोह में आरएसबी ग्रुप के वाइस चेयरमैन एस.के. बेहेरा सहित कंपनी के वरिष्ठ पदाधिकारी और विभिन्न इकाइयों से बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी मौजूद रहीं। इस वर्ष ‘एक पहल’ परिवार का विस्तार करते हुए सेटको की 200 से अधिक महिला कर्मचारियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में जमशेदपुर समेत देशभर में स्थित आरएसबी ग्रुप की विभिन्न इकाइयों की महिला कर्मचारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण एक प्रेरणादायी राउंड-टेबल चर्चा रही, जिसमें रेखा पांडा, सिंगो मार्डी, लीना अडेसरा और देबोश्री दत्ता ने अपने जीवन के अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने बताया कि बड़े सपनों को साकार करने के लिए निरंतर मेहनत, समर्पण और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है। उनके अनुभवों ने उपस्थित महिलाओं को अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित किया।

इसके अलावा कर्मचारियों ने संगीत, नृत्य और रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए, जिन्होंने समारोह को भावनात्मक और उत्साहपूर्ण बना दिया।

करीब चार वर्ष पहले निर्मला बेहेरा की पहल पर शुरू हुआ यह अभियान अब एक व्यापक सामाजिक और संस्थागत आंदोलन का रूप ले चुका है। स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, सुरक्षा, सीखने एवं कौशल विकास तथा सामुदायिक सेवा जैसे चार प्रमुख स्तंभों के माध्यम से यह पहल कर्मचारियों और समाज के समग्र विकास की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

समारोह के दौरान बीते वर्ष उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभिन्न स्तंभों के प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया। सामुदायिक सेवा से जुड़े प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व करने वाले टीम लीडर्स को सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया गया, जबकि सुरक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले लीडर को उपविजेता के रूप में सम्मानित किया गया।

आरएसबी ग्रुप ने इस अवसर पर दोहराया कि वह ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां कर्मचारियों के व्यक्तिगत सपनों को सामूहिक उपलब्धियों में बदलने का अवसर मिले और विनिर्माण क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव का नया मानक स्थापित हो।

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