चाईबासा: झींकपानी स्थित अडानी एसीसी सीमेंट कंपनी को 16 अगस्त से बंद किए जाने के प्रस्तावित फैसले के विरोध में एसीसी बचाओ संघर्ष समिति ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग की। समिति ने कहा कि कंपनी बंद होने से हजारों लोगों के रोजगार और आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के तीन दिवसीय पश्चिम सिंहभूम जिला भ्रमण के अंतिम दिन चाईबासा परिसदन में एसीसी बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक रमेश बालमुचू के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान समिति ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपकर कंपनी बंद करने के प्रस्तावित निर्णय पर पुनर्विचार कराने की मांग की।
समिति के संयोजक रमेश बालमुचू ने बताया कि झींकपानी की यह सीमेंट फैक्ट्री लगभग 80 वर्षों से क्षेत्र की पहचान रही है। फैक्ट्री से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों श्रमिक, कर्मचारी, ट्रांसपोर्टर, छोटे व्यवसायी और अन्य लोग जुड़े हुए हैं। कंपनी बंद होने की स्थिति में बड़ी संख्या में परिवारों के सामने रोजगार और आजीविका का संकट उत्पन्न हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय सहित आसपास के कई गांवों के लोग इस उद्योग पर निर्भर हैं, इसलिए सरकार और संबंधित प्रबंधन को इस निर्णय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
समिति के अन्य सदस्यों ने भी कहा कि कंपनी बंद होने का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। उन्होंने बाबूलाल मरांडी से इस मामले में हस्तक्षेप कर कंपनी को बंद होने से बचाने की दिशा में पहल करने का आग्रह किया।
प्रतिनिधिमंडल की बातें सुनने के बाद बाबूलाल मरांडी ने मामले को गंभीर बताया। उन्होंने वहीं से कंपनी प्रबंधन के संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर संपर्क कर फैक्ट्री बंद करने के प्रस्तावित निर्णय के कारणों की जानकारी लेने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यदि कंपनी बंद करने का निर्णय लिया जा रहा है तो उसके पीछे के कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह मामला केवल एक उद्योग का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के रोजगार और भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे को संबंधित स्तर पर उठाया जाएगा और आवश्यक पहल की जाएगी, ताकि क्षेत्र के लोगों के हितों की रक्षा हो सके।

