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मलेरिया पर जीरो टॉलरेंस नीति, निजी अस्पतालों को तत्काल रिपोर्टिंग और इलाज के दिए निर्देश

जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया संक्रमण की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग और निजी चिकित्सा संस्थानों के साथ समन्वित अभियान शुरू कर दिया है। सोमवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में जिले के प्रमुख निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम के प्रतिनिधियों के साथ कार्यशाला सह समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मलेरिया के मामलों की समय पर पहचान, त्वरित रिपोर्टिंग और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने के लिए कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए गए।

उपायुक्त राजीव रंजन ने कहा कि मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है, जब सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थान मिलकर कार्य करें। उन्होंने सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम संचालकों को निर्देश दिया कि किसी भी मरीज में मलेरिया की पुष्टि होने पर उसकी सूचना 24 घंटे के भीतर सिविल सर्जन कार्यालय को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं। साथ ही मरीज का इलाज बिना विलंब शुरू किया जाए, ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।

बैठक में मलेरिया प्रभावित प्रखंडों पोटका, डुमरिया, मुसाबनी, घाटशिला और धालभूमगढ़ से आने वाले बुखार के मरीजों की विशेष निगरानी करने पर जोर दिया गया। उपायुक्त ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि निजी अस्पतालों से मलेरिया की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम संबंधित गांव और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचकर रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) के माध्यम से लोगों की जांच करे तथा संक्रमित मरीजों का तत्काल उपचार सुनिश्चित करे। साथ ही संभावित संक्रमण वाले क्षेत्रों में सर्विलांस भी तेज किया जाए।

बैठक में मलेरिया नियंत्रण के लिए निर्धारित समयबद्ध कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इसके तहत 24 घंटे के भीतर मलेरिया के मामले की सूचना दर्ज करने, जांच कराने और इलाज शुरू करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। वहीं 72 घंटे के भीतर संक्रमित मरीज के संपर्क में आए लोगों और आसपास के बुखार पीड़ित व्यक्तियों की पहचान कर उनकी जांच एवं आवश्यक उपचार पूरा किया जाएगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रतिनिधि ने बताया कि झारखंड के कई जिले अभी भी मलेरिया के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील हैं। ऐसे में समय पर जांच, सटीक रिपोर्टिंग और समुचित उपचार ही संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने का सबसे प्रभावी उपाय है। सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने भी निजी अस्पतालों से अपील की कि वे मलेरिया के हर संदिग्ध और पुष्ट मामले की सूचना तत्काल स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराएं तथा जिले को मलेरिया मुक्त बनाने के अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

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