दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा आशुतोष तिवारी को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। प्रत्याशी चयन को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया, जबकि सोशल मीडिया पर भी पार्टी के फैसले के खिलाफ लगातार प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
भाजपा के एक वर्ग का आरोप है कि टिकट वितरण में वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृह मंत्री नवरत्न मिश्रा की अनदेखी की गई है। उनके समर्थकों का कहना है कि लंबे समय से संगठन और क्षेत्र में सक्रिय रहे नेता को नजरअंदाज किए जाने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। इसी मुद्दे को लेकर दतिया में विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए गए और पार्टी नेतृत्व से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई गई।
राजनीतिक घटनाक्रम उस समय और तेज हो गया जब भाजपा के जिला स्तर के कई पदाधिकारियों ने अपने पदों से सामूहिक इस्तीफे की घोषणा कर दी। वहीं, कुछ पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटे के भीतर प्रत्याशी चयन पर पुनर्विचार नहीं किया गया और नवरत्न मिश्रा को उम्मीदवार नहीं बनाया गया, तो वे पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे देंगे।
सूत्रों के मुताबिक, दतिया के अलावा अन्य जिलों में भी कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की स्थिति बनी हुई है। विरोध कर रहे नेताओं का कहना है कि यदि पार्टी नेतृत्व ने समय रहते स्थिति को नहीं संभाला, तो संगठन के भीतर नाराजगी और बढ़ सकती है तथा इस्तीफों का सिलसिला भी तेज हो सकता है।
दतिया उपचुनाव अब केवल चुनावी मुकाबले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भाजपा के लिए संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की भी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। ऐसे में राजनीतिक हलकों की नजरें अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं कि वह बढ़ते असंतोष को दूर करने और संगठन को एकजुट रखने के लिए क्या कदम उठाता है।

