चाईबासा: झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी), रांची में आयोजित तीन दिवसीय भारतीय भाषा समागम शिविर में पश्चिमी सिंहभूम जिले की टीम हो भाषा का प्रतिनिधित्व कर रही है। शिविर का शुभारंभ राज्य परियोजना निदेशक एवं जेसीईआरटी निदेशक शशि रंजन ने किया। कार्यक्रम में भाषाई विविधता, बहुभाषी शिक्षा और स्थानीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम में जेसीईआरटी के वरिष्ठ पदाधिकारी विंध्याचल पांडेय एवं बांके बिहारी मौजूद रहे। भाषा विशेषज्ञ महादेव टोप्पो एवं वंदना टेटे ने प्रतिभागियों के साथ अपने विचार साझा करते हुए मातृभाषा आधारित शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।
शिविर में तकनीकी सहयोगी संस्था लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन एवं यूनिसेफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसमें राज्य के सभी 24 जिलों से आए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के संकाय सदस्य और स्कूली बच्चों ने सक्रिय भागीदारी की।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पांच विभिन्न भाषाओं पर आधारित प्रदर्शनी स्टॉल रहा, जहां बहुभाषी और द्विभाषी पुस्तकों का संग्रह प्रदर्शित किया गया। स्टॉल भ्रमण के दौरान शशि रंजन ने पुस्तकों का अवलोकन किया और बहुभाषी शिक्षण सामग्री को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
शिविर में राज्य के सभी जिला कार्यक्रम समन्वयकों की उपस्थिति रही। लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन के राज्य प्रमुख पल्लवी शाह एवं राज्य प्रबंधक वलीउल्लाह ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
पश्चिमी सिंहभूम जिले की टीम में कृष्णा देवगम, विमल किशोर बोइपाई, मंगल सिंह मुंडा, अनुपमा, अनिल कुमार, विनीता गोप और हरिनारायण सिन्हा सहित मांगीलाल रूंगटा स्कूल के बच्चे शामिल हैं। टीम द्वारा शिविर में हो भाषा, संस्कृति और लोक परंपराओं का प्रतिनिधित्व किया जा रहा है।
तीन दिवसीय भारतीय भाषा समागम शिविर भाषा, संस्कृति और शिक्षा के बीच एक सेतु का कार्य कर रहा है। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को विभिन्न भारतीय भाषाओं, लोकज्ञान परंपराओं और बहुभाषी शिक्षण पद्धतियों को समझने का अवसर मिल रहा है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

