जमशेदपुर: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता के मुद्दे पर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) ने मंगलवार को जमशेदपुर उपायुक्त कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष जयराम महतो के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के नाम संबोधित मांग पत्र उपायुक्त को सौंपा।
धरना को संबोधित करते हुए JLKM के जिला अध्यक्ष तपन महतो ने आरोप लगाया कि राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लगातार सवालों के घेरे में रही है। उन्होंने कहा कि कथित पेपर लीक, अनियमितताओं और धांधली की घटनाओं से लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा भर्ती प्रक्रिया से उठता जा रहा है। ऐसे में सरकार को निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
संगठन ने आयोगों की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार की मांग करते हुए सुझाव दिया कि जेपीएससी और जेएसएससी के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति के लिए एक उच्चस्तरीय चयन समिति का गठन किया जाए। प्रस्तावित समिति में न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के एक-एक प्रतिनिधि शामिल हों तथा इसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री करें, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बन सके।
JLKM ने संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत झारखंड लोक सेवा आयोग की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा कराने की भी मांग उठाई। संगठन का कहना है कि यदि आवश्यक हो तो संयुक्त लोक सेवा आयोग के गठन की संभावनाओं पर भी गंभीरता से विचार किया जाए। साथ ही संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की कार्यप्रणाली, तकनीकी सहयोग और सर्वोत्तम मानकों को राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में लागू करने की मांग भी की गई।
तपन महतो ने कहा कि झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी छात्र-युवाओं के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक जारी रखेगी।
धरना-प्रदर्शन के दौरान संगठन ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और आयोगों में संरचनात्मक सुधार लागू करने की मांग दोहराई। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, अभ्यर्थी, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

