Breaking
Sun. May 3rd, 2026

यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी के खिलाफ आंदोलन तेज, अब खड़गपुर मंडल तक बढ़ेगा दायरा

जमशेदपुर। यात्री ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी के विरोध में रेल यात्री संघर्ष समिति ने अपने आंदोलन को और व्यापक करने का फैसला लिया है। अब तक चक्रधरपुर मंडल की ट्रेनों को लेकर सक्रिय रही समिति ने खड़गपुर मंडल की देरी से चलने वाली ट्रेनों के खिलाफ भी मोर्चा खोलने की घोषणा की है। इस निर्णय पर मुहर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय के बारीडीह स्थित कार्यालय में आयोजित बैठक में लगी।

बैठक में तय किया गया कि 17 मई से शहर के विभिन्न इलाकों में हस्ताक्षर अभियान चलाकर आम लोगों को इस आंदोलन से जोड़ा जाएगा। अभियान की शुरुआत साकची गोलचक्कर से होगी, इसके बाद 18 मई को स्टार टॉकीज के पास और 19 मई को मानगो स्थित एमजीएम अस्पताल के समीप कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। वहीं 24 मई को घाटशिला में भी हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।

समिति के संयोजक शिवशंकर सिंह ने कहा कि ट्रेनों की देरी अब आम लोगों के लिए गंभीर समस्या बन चुकी है, इसलिए आंदोलन को और तेज किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस पहल को लगातार जनसमर्थन मिल रहा है और रेलवे प्रशासन पर दबाव भी बढ़ रहा है।

बैठक में विधायक सरयू राय ने ट्रेनों की समयपालन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई ट्रेनें चांडिल तक समय पर पहुंचती हैं, लेकिन टाटानगर आते-आते 30 मिनट से लेकर कई घंटे तक लेट हो जाती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि रांची से हावड़ा जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस भी टाटानगर जंक्शन पर देरी से पहुंची। उन्होंने कहा कि जब प्रीमियम ट्रेन का यह हाल है तो सामान्य ट्रेनों की स्थिति समझी जा सकती है।

सरयू राय ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि जनहित में चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे के दावों और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर है, जिसे लगातार उजागर किया जा रहा है। यही कारण है कि रेलवे बोर्ड भी अब इस आंदोलन को लेकर चिंतित है।

उन्होंने रेलवे के बुनियादी ढांचे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देशभर में रेल लाइनों का विस्तार हुआ है, लेकिन आदित्यपुर से सलगाजुड़ी के बीच तीसरी लाइन अब तक नहीं बन सकी है। उनके अनुसार, यदि अब इस पर काम शुरू भी किया जाए तो इसे पूरा होने में कई महीने लग जाएंगे, जिससे यात्रियों की परेशानी बनी रहेगी।

बैठक में मौजूद विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। वक्ताओं ने कहा कि ट्रेनों की देरी से छात्रों, मजदूरों और रोजाना सफर करने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। घाटशिला और आसपास के इलाकों से जमशेदपुर आने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई भी इससे प्रभावित हो रही है।

नेताओं ने कहा कि आंदोलन का असर अब दिखने लगा है और कुछ ट्रेनों के समय में सुधार भी हुआ है, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इसलिए संघर्ष को जारी रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन को और मजबूत बनाने के लिए लोगों को जागरूक करना और बड़े पैमाने पर भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।

बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि ट्रेनों की देरी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाए, संबंधित स्थानों पर धरना-प्रदर्शन किया जाए और रेलवे की कार्यप्रणाली को सार्वजनिक रूप से उजागर किया जाए। साथ ही सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से इस अभियान में जुड़ने की अपील की गई।

समिति के सदस्यों ने कहा कि यह लंबी लड़ाई है और इसके लिए धैर्य के साथ निरंतर प्रयास की जरूरत होगी, ताकि यात्रियों को समय पर और बेहतर रेल सेवा मिल सके।

Related Post