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आनंद मार्ग ने 100 से अधिक रक्तवीरों को किया सम्मानित जमशेदपुर। मानव सेवा और आध्यात्मिक चेतना के अद्भुत संगम का उदाहरण शनिवार को उस समय देखने को मिला, जब आनंद मार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम ग्लोबल (AMURT) की ओर से गदरा स्थित आनंद मार्ग आश्रम में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 100 से अधिक नियमित रक्तदाताओं को “रक्तवीर” की उपाधि देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य उन लोगों को प्रोत्साहित करना था, जिन्होंने भय और संकोच को पीछे छोड़ते हुए नियमित रूप से रक्तदान कर समाज में जीवन बचाने का कार्य किया है। सम्मानित सभी रक्तदाता आनंद मार्ग द्वारा हर महीने जमशेदपुर ब्लड सेंटर में आयोजित होने वाले मासिक रक्तदान शिविर में सक्रिय भागीदारी निभाते रहे हैं। समारोह में आनंद मार्ग के वरिष्ठ संन्यासियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। उन्होंने रक्तवीरों को आशीर्वाद देते हुए इसे न केवल सामाजिक बल्कि आध्यात्मिक सेवा भी बताया। वक्ताओं ने कहा कि रक्तदान केवल शारीरिक सहायता नहीं, बल्कि मानवता के प्रति निस्वार्थ समर्पण का प्रतीक है। इस मौके पर सुनील आनंद ने अपने संबोधन में रक्तदान के आध्यात्मिक पक्ष को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि यदि रक्तदान को परमात्मा के प्रति समर्पण भाव से किया जाए, तो यह एक साथ दोहरा पुण्य प्रदान करता है—एक ओर जरूरतमंद को जीवन मिलता है और दूसरी ओर दाता के मन और शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि “रक्तदान का कोई विकल्प नहीं है। यह ऐसा दान है, जो सीधे किसी के जीवन से जुड़ा होता है और इसे निस्वार्थ भाव से करना ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।” उन्होंने आगे कहा कि जब व्यक्ति यह सोचकर रक्तदान करता है कि वह परम पुरुष की संतानों के कष्ट को कम करने में योगदान दे रहा है, तब उसका यह कार्य और भी महान बन जाता है। यही भावना रक्तदाता को ‘रक्तवीर’ बनाती है, क्योंकि वह भय वृत्ति पर विजय प्राप्त कर समाज के लिए आगे आता है। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग के निर्धारित मानकों के अनुसार हर 90 दिन के अंतराल पर नियमित रक्तदान करने वाले व्यक्तियों को ही इस सम्मान के लिए चयनित किया गया। इससे यह सुनिश्चित होता है कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित और स्वास्थ्य के अनुकूल हो। समारोह के अंत में सभी रक्तवीरों को सम्मान पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। पूरे कार्यक्रम में सेवा, समर्पण और आध्यात्मिकता की भावना स्पष्ट रूप से झलक रही थी। आयोजकों ने भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।
Sat. May 2nd, 2026

बोकारो थर्मल पावर स्टेशन फिर से दामोदर को प्रदूषित करने लगाः सरयू राय बोकारो के उपायुक्त को राय ने भेजी बहिस्राव की कई तस्वीरें

रांची। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा है कि दामोदर वैली कारपोरेशन (डीवीसी) की ताप बिजली घर बोकारो थर्मल पावर स्टेशन (बीटीपीएस) फिर से दामोदर नद को प्रदूषित करने लगा है। ताप बिजली घर से निकल रहा दूषित बहिस्राव, जो राख, छाई, तैलीय पदार्थों एवं हानिकारक रसायनिक पदार्थों से युक्त है; सीधे कोनार नदी और दामोदर नद के संगम स्थल के समीप गिर रहा है और दामोदर को प्रदूषित कर रहा है।

यहां जारी एक वक्तव्य में श्री राय ने कहा कि विद्युत उत्पादन की प्रक्रिया में ताप बिजली घर से निकला यह दूषित बहिस्राव सीधे ऐश पौंड में भेजा जाता है ताकि यह नदी में न गिरे और ऐश पौंड से इसका निस्तार कर दिया जाए। आश्चर्यजनक है कि ऐश पौंड में जमा यह दूषित बहिस्राव ऐश पौंड से ही नदी में गिराया जा रहा है।

सरयू राय ने बताया कि दामोदर बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने शनिवार की सुबह बीटीपीएस प्रबंधन द्वारा ऐश पौंड में जाने वाले दूषित बहिस्राव के कोनार-दामोदर में गिराए जाने का चित्र भेजा है। वस्तुतः दूषित बहिस्राव को ऐश पौंड में ले जाने वाला पाईपलाइन एैश पौंड के ठीक पहले फट गया है, जिस कारण दूषित बहिस्राव ऐशपांड में जाने के बदले बाहर गिर रहा है और समीपवर्ती नाला के माध्यम से कोनार नदी में गिरकर दामोदर को प्रदूषित कर रहा है। यह पहली घटना नहीं, जब ऐसा हो रहा है। कभी इनका पाईप फट जाता है, कभी ऐशपॉंड की दीवार टूट जाती है। नतीजतन कोनार नदी और दामोदर नद इनकी लापरवाही के कारण प्रदूषित होते रहता है।

सरयू राय ने कहा कि उन्होंने दूषित बहिस्राव के कोनार-दामोदर में गिराए जाने का चित्र के अनेक चित्र बोकारो के उपायुक्त को भेजा है और आग्रह किया है कि जिला पर्यावरण समिति के अध्यक्ष की शक्तियों का प्रयोग करते हुए दामोदर का प्रदूषण रोकें और बीटीपीएस प्रबंधन पर कठोर कार्रवाई करें.

उन्होंने यह भी कहा कि बीटीपीएस प्रबंधन आदतन अपना दूषित बहिस्राव समय-समय पर दामोदर में गिरा दे रहा है क्योंकि बीटीपीएस के ऐश पौंड में जमा राख का नियमित निस्तारण नहीं हो पा रहा है। यदि अभी ऐसी स्थिति है तो बरसात के समय क्या होगा, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। तब पावर प्लांट से निकलने वाला दूषित बहिस्राव सीधे नदी में डाल दिया जाएगा जो बढ़े जल प्रवाह के साथ बहकर आगे निकल जाए और प्रदूषण का सबूत न छोड़े। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वैधानिक ज़िम्मेवारी है कि वह प्रदूषण नहीं रोकने वाले उद्योगों पर कारवाई करे।

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