संवाददाता
लोहरदगा: जिला सदर अस्पताल में कथित लापरवाही ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को 40 वर्षीय नईम खान की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि लोगों ने शव को सुभाष चौक (पावरगंज) के बीच सड़क पर रखकर लोहरदगा–कुड़ू मुख्य मार्ग को जाम कर दिया, जिससे करीब दो घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना ने इसलिए भी ज्यादा तूल पकड़ लिया क्योंकि महज एक दिन पहले ही उपायुक्त ने सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की सख्त चेतावनी दी थी। लेकिन 24 घंटे के भीतर ही एक मरीज की मौत ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नईम खान की हालत लगातार बिगड़ रही थी, लेकिन डॉक्टर और नर्सों ने समय पर कोई ध्यान नहीं दिया। परिजन इलाज की गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी पुकार अनसुनी कर दी गई। उनका कहना है कि अगर समय रहते सही इलाज मिल जाता, तो नईम की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना ने अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों की देखभाल व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मौत की खबर फैलते ही सैकड़ों लोग सुभाष चौक पर जमा हो गए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने दोषी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर तत्काल FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की। साथ ही मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी, बच्चों की मुफ्त शिक्षा, परिवार को उचित मुआवजा और आवास उपलब्ध कराने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई। नईम खान अपने पीछे छह छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनके सामने अब जीवनयापन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया। सदर अंचल अधिकारी राम नारायण खलको, सब-इंस्पेक्टर रवि रंजन कुमार सहित अन्य अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। नगर परिषद उपाध्यक्ष अब्दुल कादिर और कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी बीच-बचाव कर माहौल शांत कराने की कोशिश की। अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद करीब दो घंटे बाद जाम हटाया गया और यातायात बहाल हो सका। इस बीच स्थानीय लोगों ने भी अस्पताल प्रबंधन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार लापरवाही के आरोप लगे हैं, लेकिन हर बार जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है और जिम्मेदारों को बचा लिया जाता है। यही वजह है कि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति हो रही है। बढ़ते विवाद के बीच सिविल सर्जन डॉ. राजू कच्छप ने मामले को गंभीर बताते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश की बात कही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी डॉक्टर या कर्मी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि उपायुक्त की सख्त चेतावनी के बावजूद अस्पताल की व्यवस्था क्यों नहीं सुधरी, और क्या नईम खान के परिवार को वास्तव में न्याय मिल पाएगा या यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

