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खरसावां में दो गुमशुदगियों के बाद उजागर हुए दोहरे हत्याकांड, खेत विवाद और अंधविश्वास ने ली तीन लोगों की जान

सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिला हाल के दिनों में दो दिल दहला देने वाली घटनाओं से दहशत में है। खरसावां थाना क्षेत्र के रायजामा गांव से गुमशुदगी के दो मामलों की जांच के दौरान पुलिस ने तीन लोगों के शव बरामद किए हैं — जिनमें एक विवाहित दंपति और एक वृद्ध महिला शामिल हैं। पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि दोनों मामलों में हत्या के बाद सबूत मिटाने के उद्देश्य से शवों को जमीन में दफना दिया गया था। घटनाओं का पर्दाफाश होते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।

पहला मामला रायजामा गांव के चेतानपुरा टोला का है, जहां खेत में पानी पटाने को लेकर हुआ मामूली विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। इस विवाद में 39 वर्षीय ठाकुरा सरदार और उनकी पत्नी 41 वर्षीय चाँदमनी मुंडा की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। हत्या के बाद आरोपियों ने दोनों शवों को खेत में ही गाड़ दिया और किसी को भनक नहीं लगने दी। लगभग दस दिन बाद पुलिस को गुप्त सूचना मिली, जिसके आधार पर जांच दल मौके पर पहुंचा और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में मिट्टी खोदकर दोनों शव बरामद किए। शवों को पहले सरायकेला सदर अस्पताल भेजा गया, बाद में स्थिति खराब होने के कारण पोस्टमार्टम और विसरा जांच के लिए एमजीएम अस्पताल, जमशेदपुर रेफर किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस हत्याकांड में शामिल मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

दूसरा मामला अंधविश्वास और क्रूरता की हदें पार करने वाला है। इसी गांव की 62 वर्षीय गुरुवार सरदार 31 अक्टूबर से लापता थीं। परिजनों द्वारा गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और शक के आधार पर गांव के ही गुरबा सरदार और सोमा सरदार को हिरासत में लिया। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने गुरुवार सरदार पर डायन-बिसाही का आरोप लगाकर उन्हें प्रताड़ित किया और फिर हत्या कर दी। अपराधियों ने शव को छिपाने के लिए गोबरगोटा पहाड़ के पास जमीन में दफना दिया था। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने मंगलवार को वृद्धा का शव बरामद किया।

एसडीपीओ समीर कुमार सवैया ने बताया कि दोनों हत्याकांडों के सभी आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं और उनसे पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से समाज में व्याप्त अंधविश्वास और आपसी रंजिश के दुष्परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। वहीं, जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने घटनाओं पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आदिम जनजातीय क्षेत्रों में अंधविश्वास के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाना समय की मांग है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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