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महुआडांड़ स्थित असकाफतूल हनफिया फोनडेन्सन,में बच्चियां करती हैं उस्तानिया से मौलवी तक की पढ़ाई।

महुआडांड़ स्थित असकाफतूल हनफिया फोनडेन्सन,में बच्चियां करती हैं उस्तानिया से मौलवी तक की पढ़ाई।

महुआडांड़ संवाददाता शहजाद आलम की रिपोर्ट

महुआडांड़ स्थित असकाफतूल हनफिया फोनडेन्सन का रजिस्ट्रेशन 2013-14 हुआ है। जैसे ही रजिस्ट्रेशन हुआ यहां के मकामी बच्चियों का पढ़ाई प्रारंभ कर दिया गया।सुरवात में उस वक्त 25 बच्चियां पढ़ाई करती थी।जो 2018-19 में बढ़कर 40 हो गया, और आज 2022 में 65 बच्चियां पढ़ाई करती हैं। जो सभी 65 बच्चियां असकाफतूल हनफिया फोनडेन्सन के द्वारा निर्मित हॉस्टल में रहती हैं और रहना खाना पीना सारा कुछ सुविधा दी जाती है। साथ ही महुआडांड़ की स्थानीय बच्चियां भी 50 से 60 पढ़ती है। जो यहां हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करती हैं। वह झारखंड छत्तीसगढ़ दोनों जगह की बच्चियां और एक उड़ीसा की बच्ची भी यहां पर पड़ती है। जैसे झारखंड से लातेहार, पलामू, गढ़वा, लोहरदगा, सिमडेगा, गुमला, गोड्डा, भागलपुर, वहीं छत्तीसगढ़ के कुसमी, जवाहर नगर, सरईडीह, दुर्गापुर, शंकरगढ़, अंबिकापुर एवं उड़ीसा के बनडेगा से भी एक बच्ची पड़ती है। इस तरह से अगर देखा जाए तू इस फाउंडेशन में तीन राज्य की बच्चियां अभी तक अपना पढ़ाई कर रही हैं। अगर हॉस्टल की बात की जाए तो हॉस्टल में अच्छे ढंग से रहने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। वही सभी को एक टाइम का नाश्ता और दो टाइम का खाना दिया जाता है। दो पाली में पढ़ाई कराया जाता है। वही दीनी तालीम को लेकर क्लास प्रारंभ होने से पूर्व में ही कुरान पढ़ने के लिए सिखाया जाता है जिसमें कई बच्चों ने कुराने पाक खत्म कर उसका दौर भी शुरू कर दिया है। इस संबंध में असकाफतूल हनफिया फोनडेन्सन के संस्थापक मौलाना मुस्ताक अहमद ज्याई ने बताया कि यहां पर उर्दू, अरबी, हिंदी, फारसी, इंग्लिश, गणित, विज्ञान,समाजिक विज्ञान,समेत सभी विषयों का पढ़ाई कराया जाता है। उस्मानिया, फोकानिया, मौलवी तक की पढ़ाई होती है। सभी को इसकी तैयारी कराई जाती हैं। अगले सत्र में उस्तानिया की परीक्षा के लिए 20 बच्चियों को डाल्टनगंज ले जाकर परीक्षा दिलाया गया था। परीक्षा में 3 बच्चियां फर्स्ट डिवीजन से पास किए और एवं 17 बच्चियां सेकंड डिवीजन से पास की है। और अब यह सारी बच्चियां फोकानिया की तैयारी में जुट गई है।यहां पर पढ़ाने के लिए एक मैं खुद पढ़ाता हूं और 4 महिला शिक्षक को रखा गया है जो बखूबी अपना कार्य को अंजाम देती है। अगर देखा जाए तो लातेहार जिला में लड़कियों का मदरसा महुआडांड़ में ही स्थित है। और जिला में इस तरह का मदरसा कहीं नहीं है जिसमें हॉस्टल की सुविधा हो। और उस्तानिया, फोकानिया, मौलवी की परीक्षा की तैयारी कराई जा रही हो। अभी तक इस मदरसे में सरकार की तरफ से कुछ भी नहीं किया गया है अगर सरकार इस ओर ध्यान देती है तो और भी बहुत कुछ हो सकता है।

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