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पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया जश्ने ईद मिलादुन्नबी, निकाली गई जुलूस, जगह जगह पर किया गया था लंगर खानी का एहतमाम।

पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया जश्ने ईद मिलादुन्नबी, निकाली गई जुलूस, जगह जगह पर किया गया था लंगर खानी का एहतमाम।

महुआडांड़ संवाददाता शहजाद आलम की रिपोर्ट

प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी महुआडांड़ में मुस्लिम समुदाय द्वारा काफी संख्या में एकत्रित होकर पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्मदिन यानी जश्ने ईद मिलादुन्नबी पर जुलूस निकाला।ईद मिलादुन्नबी जुलूस जामा मस्जिद से प्रारंभ होकर अंबाटोली पहुंची जहां गौसिया मस्जिद से जुलूस निकाल सर सभी साथ हो लिए। जिसके बाद यह जुलूस गुरगुटोली पहुंची और फिर उसी रास्ते से पुणे वापस होते हुए पोस्ट ऑफिस रोड मुख्य बाजार शास्त्री चौक गांधी चौक आजाद मार्केट दीपाटोली होते हुए जामा मस्जिद के पिछले दरवाजे पर पहुंचे जुलूस की समाप्ति की गई। इससे पूर्व जामा मस्जिद के मोहतमिम मौलाना सऊद आलम मिस्बाही के द्वारा हजरत पैगंबर मोहम्मद की जीवनी पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला गया।और उनके द्वारा किए गए कार्यों को बताया गया, उन्होंने कहा कि उनके बताए रास्ते पर चलकर ही कामयाबी हासिल किया जा सकता है। यह अव्वल भी है और आखिर भी है। अल्लाह तबारक व ताला ने इसके बाद नबूवत का रास्ता बंद कर दिया। जाहिरी जिंदगी में लोग हजरत मोहम्मद को देखकर ईमान ले आया करते थे आप आज उनकी वादों नसीहत जो हदीस और कुरान की शक्ल में मौजूद है जिसे सून कर आज भी लोग ईमान के दौलत से मालामाल हो रहे हैं। 12 रबी उल अव्वल के दिन हजरत मोहम्मद की पैदाइश हुई जिसे हम मुसलमान ईदो का ईद ईद मिलादुन्नबी के नाम से जानते हैं। ये अल्लाह का एहसान है अल्लाह ने हमें हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम जैसा नबी दिया। आगे अल्लाह ने फरमाया कि इन्हें दुनिया में उतारकर मैं तुम पर एहसान कर रहा हूं और यह सारे दुनिया के लिए रहमत बनाकर भेजा है। इसीलिए आज के दिन दुनिया के हर एक कोने में जहां भी मुस्लिम की आबादी है वहां पर लोग ईद मिलादुन्नबी मना कर अपनी खुशी का इजहार करते हैं। वहीं मुख्य बाजार शास्त्री चौक में जामा मस्जिद के इमाम अख्तर रजा एवं गौसिया मस्जिद के मौलाना गुलाम सरवर के द्वारा पैगंबर मोहम्मद के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि जब पैगंबर मोहम्मद को अल्लाह तबारक व ताला को दुनिया में भेजना था तो इससे पूर्व कई पैगंबरों को अल्लाह तबारक व ताला में दुनिया में भेजा और सभी ने पैगंबर मोहम्मद की मिलाद मनाई। मिलाद मनाना अंबिया अली सलातो अस्सलाम की सुन्नत है। पैगंबर मोहम्मद की पैदाइश से पूर्व में बहुत ही अजीबोगरीब मंजर हुआ करता था। उस दौरे जहिलियत में लोग अपने बेटियों को जिंदा दफन कर दिया करते थे बेवाओं को नीच नजर से देखा करते थे। गरीबों को भी कहीं सुकून नहीं दिया जाता था। लोग एक दूसरे पर जुल्म किया करते थे। तब इसी ईद मिलादुन्नबी के दिन इस्लाम के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद साहब का जन्म मक्का( सऊदी अरब) में लगभग 570 ईसवी में इस्लामिक कैलेंडर के तीसरे महीने रबी अल अव्वल के महीने के 12 वे दिन हुआ था। यह मुसलमानों की सबसे अहम तरीन त्यौहार है जिसे ईदो का ईद ईद मिलादुन्नबी कहा जाता है। इस दिन लोग अपने घर से साफ-सुथरे कपड़े करने को जुलूस में शामिल होते हैं जगह-जगह लंगर का एहतमाम जाता है। वहीं दीपावली, अम्वाटोली,गुरगुटोली महुआडांड़ सभी स्थानों पर लंगर खानी, पानी, शरबत, बिस्किट, समेत अन्य तरह के नास्तों का एहतमाम किया गया था। और जुलूस में शामिल लोग या रसूल अल्लाह या नबी अल्लाह, सरकार की आमद मरहबा, आका की आमद मरहबा, दाता की आमद मरहबा, मदनी की आमद मरहबा, मक्की की आमद मरहबा, पत्ती पत्ती फूल फूल या रसूल या रसूल समेत अन्य नारो से पूरा महुआडांड़ गूंज उठा, पैगंबर मोहम्मद साहब की खूब कसीदे भी पढ़ें गए। मौके पर सदर फहीम खान, नाइट सदर सद्दाम और शेरू, खजांची शाहिद कमाल, खुर्शीद आलम, हाफिज साहब जावेद अहमद, सगीर अहमद, जुबेर अहमद, असद अहमद, डॉक्टर जमशेद खान, समेत सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम धर्मावलंबी जुलूसए मोहम्मदी में शामिल थे।

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