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Wed. Jun 3rd, 2026

एसटी आयोग की जांच रिपोर्ट पर बायपास सड़क भूमि अधिग्रहण विवाद तेज, रैयतों ने जताई आपत्ति

चाईबासा: एनएच-75 (विस्तार) बाइपास सड़क निर्माण के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण का विरोध स्थानीय स्तर पर लगातार जारी है। सन्नी सिंकू के नेतृत्व वाले झारखंड पुनरुत्थान अभियान ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में शिकायत की थी। आयोग के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है।

जांच रिपोर्ट में भू-अर्जन पदाधिकारी ने अंचलाधिकारी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि प्रस्तावित बाइपास सड़क निर्माण से कोई भी रैयत भूमिहीन या विस्थापित नहीं होगा। रिपोर्ट के अनुसार किसी भी रैयत की आवासीय भूमि, सरना स्थल, पूजा स्थल या अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों का अधिग्रहण प्रस्तावित नहीं है। अधिग्रहित की जाने वाली भूमि को एक फसली असिंचित धान भूमि बताया गया है तथा किसी भी रैयत की 50 डिसमिल से अधिक भूमि अधिग्रहित नहीं की जा रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बाइपास सड़क निर्माण से भारी वाहनों का आवागमन शहर के बाहरी क्षेत्र से होगा, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी और आसपास के क्षेत्रों के विकास के साथ भूमि का मूल्य भी बढ़ेगा। भूमि अधिग्रहण को जनहित में झारखंड सरकार की पहल बताया गया है। इस परियोजना के तहत 16 गांवों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है।

भू-अर्जन पदाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में झारखंड पुनरुत्थान अभियान द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया है। उल्लेखनीय है कि अभियान के महासचिव अमृत माझी ने भूमि अधिग्रहण में अनियमितता का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद आयोग ने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त से रिपोर्ट मांगी थी।

वहीं झारखंड पुनरुत्थान अभियान के नेतृत्वकर्ता सन्नी सिंकू ने जांच रिपोर्ट को त्रुटिपूर्ण और असंतोषजनक बताया है। उनका कहना है कि भूमि सर्वे और अधिग्रहण प्रक्रिया में कई अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ड्रोन के माध्यम से कार्यालय में बैठकर सर्वे किया गया तथा प्रभावित रैयतों और ग्रामीणों से कोई समुचित परामर्श नहीं लिया गया।

सन्नी सिंकू ने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के प्रभावित नहीं होने का दावा किया गया है, जबकि कई गांवों में ऐसे स्थल अधिग्रहण की जद में आ रहे हैं। उनके अनुसार इससे अनुसूचित क्षेत्रों की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत प्रभावित होगी, जबकि कानून में इनके संरक्षण का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि यदि त्रुटिपूर्ण सर्वे और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में सुधार नहीं किया गया तो इसके खिलाफ व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से दोबारा शिकायत करने की बात भी कही है।

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