1200 रुपये महीने में 23 हजार गोवंश की सेवा का लिया संकल्प
चाकुलिया: गोवंश संरक्षण और सेवा की दिशा में जमशेदपुर के व्यापारिक जगत ने एक मिसाल पेश की है। रविवार को चाकुलिया स्थित ‘गोलोक धाम गौशाला’ (ध्यान फाउंडेशन) पहुंचे शहर के लगभग 500 छोटे एवं मझौले व्यवसायियों ने गो-सेवा का सामूहिक संकल्प लिया। गौशाला के कार्यों से प्रभावित होकर इन कारोबारियों ने न केवल आर्थिक सहयोग का वादा किया, बल्कि एक-एक गोवंश को गोद लेने की भी घोषणा की।
न्यूनतम सहयोग से अधिकतम सेवा का संकल्प
व्यवसायी राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में गौशाला के प्रबंधन ने सेवा कार्यों के खर्च का विवरण साझा किया। बताया गया कि एक गाय के समुचित पालन-पोषण पर प्रतिदिन लगभग 40 रुपये, यानी प्रतिमाह 1200 रुपये का खर्च आता है। यह सुनकर उपस्थित अधिकांश व्यवसायियों ने हाथ उठाकर इस मामूली राशि के माध्यम से नियमित सहयोग देने की सहमति जताई। इस पहल का उद्देश्य गोवंश के चारे और उपचार के लिए एक स्थायी फंड सुनिश्चित करना।
तस्करी से मुक्त 23 हजार गोवंश का बसेरा
गौशाला की संचालिका डॉ. शालिनी मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में यहाँ 23,000 से अधिक गोवंश की देखभाल की जा रही है। इनमें से अधिकांश पशु भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ द्वारा बचाए गए हैं या अंतरराज्यीय तस्करी से मुक्त कराए गए हैं। खास बात यह है कि यहाँ मुख्य रूप से नंदी (बैल) और दूध न देने वाली गायों की निस्वार्थ सेवा की जा रही है, जिन्हें आमतौर पर समाज द्वारा उपेक्षित कर दिया जाता है।
80 एकड़ में फैला आधुनिक गो-सेवा केंद्र
चाकुलिया स्थित यह गौशाला लगभग 80 एकड़ के विशाल क्षेत्र में विस्तृत है। यहाँ गोवंश के लिए निम्नलिखित विशेष सुविधाएं उपलब्ध हैं:
धनवंतरी वार्ड: बीमार और घायल पशुओं के उपचार के लिए समर्पित चिकित्सा कक्ष।
स्थानीय रोजगार: गौशाला के माध्यम से 400 से अधिक स्थानीय आदिवासी श्रमिकों को रोजगार मिला हुआ है।
सुरक्षित वातावरण: पशुओं को भरपूर भोजन, उचित उपचार और तस्करी मुक्त सुरक्षित जीवन प्रदान किया जा रहा है।

