Breaking
Sun. May 10th, 2026

समस्कृतिकी-नृत्यशाला के इंडिया इंटरनेशनल डांस फेस्टिवल में झलकी भारतीय संस्कृति की विविधता

रांची। खेलगांव स्थित स्टेट म्यूजियम सभागार रविवार को भारतीय सांस्कृतिक विरासत के रंगों से सराबोर नजर आया। समस्कृतिकी और नृत्यशाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल डांस फेस्टिवल (आईआईडीएफ) में देशभर से पहुंचे कलाकारों ने शास्त्रीय और लोक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। एक ही मंच पर मोहिनीअट्टम, भरतनाट्यम, कथक, ओडिशी, बिहू और स्केटिंग डांस जैसी विविध शैलियों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को खास बना दिया। करीब 160 कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और हर प्रस्तुति पर सभागार तालियों की गूंज से भर उठा।

कार्यक्रम की शुरुआत कलामंडलम सृजा कृष्णन की मोहिनीअट्टम प्रस्तुति से हुई। भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार पर आधारित इस नृत्य में स्त्री सौंदर्य, कोमलता और भक्ति को बेहद आकर्षक ढंग से दर्शाया गया। पारंपरिक केरल शैली की सफेद-सुनहरी साड़ी, लयबद्ध मुद्राएं और हस्त लक्षण दीपिका से प्रेरित 24 प्रमुख हस्त मुद्राओं ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

इसके बाद गीतांजलि डांस इंस्टीट्यूशन की डॉ. चंद्र शालिनी कुजूर, रेशमा तिर्की, अंशिका घोष, नम्रता विश्वास, आयुषी सिंह, रिंकू कुमारी, अपराजिता करण और अदिति मिंज ने बिहू नृत्य प्रस्तुत किया। तेज गति, रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा और ढोल-पेपा की धुनों पर आधारित इस प्रस्तुति में प्रकृति, प्रेम और सामाजिक एकता की झलक दिखाई दी।

भरतनाट्यम की प्रस्तुति में सुष्मिता सेन बिस्वास, मैमोनी मंडल और स्तुति केडिया सहित कलाकारों ने भाव, राग और ताल का उत्कृष्ट संगम पेश किया। चेहरे की अभिव्यक्तियों और हस्त मुद्राओं के जरिए पौराणिक कथाओं तथा आध्यात्मिक विचारों को प्रभावशाली ढंग से मंच पर जीवंत किया गया। प्रस्तुति में आदि ताल और विष्णु के विराट स्वरूप को विशेष रूप से दर्शाया गया।

नृत्यशाला के विद्यार्थियों ने कथक की कई प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। भगवान श्रीराम के कृपालु स्वरूप, उनके दिव्य सौंदर्य और रक्षक रूप को कथक के माध्यम से मंचित किया गया। शिव तत्व को भी कथक की विभिन्न शैलियों में उकेरा गया। अनुरिमा झा और सुमोना चटर्जी के सोलो परफॉर्मेंस ने खास प्रभावित किया, जबकि कृतशाला डांस अकादमी और कलाक्षेत्र डांस इंस्टीट्यूट समूह ने सरस्वती वंदना और ठुमरी की शानदार प्रस्तुति दी।

ओडिशी नृत्य में देवसूत्र ग्रुप ने जयदेव की गीत गोविंदम पर आधारित प्रस्तुति से दर्शकों को आकर्षित किया। त्रिभंगी और चौक जैसी विशिष्ट मुद्राओं के साथ राग और ताल के सुंदर संयोजन ने प्रस्तुति को विशेष बना दिया। अरिंजिता चटर्जी, राजनंदनी, लारिसा पटनायक, साईं नम्या, युक्ति ओरान और इशिता रॉय ने भी अपनी सोलो प्रस्तुतियों से खूब प्रशंसा हासिल की।

कार्यक्रम का एक खास आकर्षण जमशेदपुर की युवा कलाकार कश्यपि का स्केटिंग डांस रहा। स्केटिंग के साथ नृत्य की अनूठी प्रस्तुति ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि झारखंड कमर्शियल टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता प्रीतम कुमार लाला ने कहा कि ऐसे आयोजनों से कलाकारों को विभिन्न राज्यों में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिए राज्यों के बीच संबंध भी मजबूत होते हैं।

नृत्यशाला की संस्थापक और आईआईडीएफ रांची की संयोजक गुरु मोनिका डे ने कहा कि पहली बार रांची में इस अंतरराष्ट्रीय नृत्य महोत्सव का आयोजन होना गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम युवाओं को भारतीय विरासत से जोड़ने के साथ-साथ पारंपरिक कला रूपों और गुरु-शिष्य परंपरा को भी सशक्त करते हैं।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि संस्कृति निदेशालय के निदेशक आसिफ एकराम ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि आईआईडीएफ कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान करता है, जहां वे एक-दूसरे की कला से सीखते और उसे आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि रांची में ऐसे आयोजन होने से झारखंड के कलाकारों को नई प्रेरणा मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान झारखंड कला मंदिर के प्रशिक्षु बच्चों ने भरतनाट्यम और कथक की प्रस्तुति दी, जबकि प्लस टू गर्ल्स हाई स्कूल की छात्राओं ने नागपुरी नृत्य से अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन में समस्कृतिकी से चंदन बिस्वा और कलामंडलम सत्यनारायण समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। जर्मनी से आईं डॉ. ईस्थर, वरिष्ठ कलाकार श्यामा प्रसाद नियोगी, सेवानिवृत्त आईपीएस संजय रंजन सिंह, अभिलाषा दास, धर्मेंद्र तिवारी, भारतेंदु झा और प्रदेश के कई प्रतिष्ठित कलाकार भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

Related Post