चाईबासा: राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान एक स्वास्थ्य सहिया महिला और उसके नवजात शिशु की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों के अनुसार अस्पताल में बिजली की व्यवस्था नहीं थी और मोबाइल या मोमबत्ती की रोशनी में प्रसव कराया जा रहा था। इस घटना को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
इस मामले पर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जब एक स्वास्थ्य सहिया, जो खुद व्यवस्था का हिस्सा है, सुरक्षित नहीं है तो आम लोगों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गीता कोड़ा ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि समस्याओं के समाधान के बजाय जवाबदेही से बचा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के सीएचसी और पीएचसी की स्थिति कमजोर है, जहां बिजली, डॉक्टर और दवाइयों की कमी बनी हुई है। उन्होंने चाईबासा और चक्रधरपुर में पहले सामने आए मामलों का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
गीता कोड़ा ने मांग की कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
साथ ही उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को इस मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है और स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने की मांग उठ रही है।

