Breaking
Sat. May 2nd, 2026

संवाद की कमी से उलझा ‘नो एंट्री’ विवाद, रांची से लौटे आंदोलनकारी अब बनाएंगे नई रणनीति

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में लंबे समय से उठ रहा ‘नो एंट्री’ का मुद्दा अब और जटिल होता जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि समाधान की संभावना होने के बावजूद सरकार और प्रशासन की ओर से संवाद की पहल नहीं होने के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। यह बात नो एंट्री आंदोलन समिति कोल्हान के संयोजक रमेश बालमुचू ने न्याय पदयात्रा से लौटने के बाद कही।

उन्होंने बताया कि चाईबासा बाईपास एमडीआर-177 मार्ग पर सुबह से रात तक भारी वाहनों के पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर 26 अप्रैल से न्याय पदयात्रा की शुरुआत की गई थी। पांच दिनों तक लगातार पैदल यात्रा करते हुए आंदोलनकारी 1 मई को रांची पहुंचे। वहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास के समीप अपनी मांगों को रखने की कोशिश की गई, लेकिन किसी भी स्तर पर बातचीत संभव नहीं हो सकी। इससे निराश होकर सभी आंदोलनकारी वापस लौट गए। अब आगे की रणनीति तय करने के लिए जल्द ही बैठक बुलाई जाएगी।

रमेश बालमुचू ने कहा कि यह पदयात्रा पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रही, जिसे महात्मा गांधी के सिद्धांतों से प्रेरित होकर निकाला गया था। पूरे मार्ग में कहीं भी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। आंदोलनकारियों की मंशा केवल मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि से मिलकर अपनी समस्याएं बताने की थी, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई।

आंदोलन समिति का आरोप है कि 1 मई को रांची पहुंचने से पहले ही विभिन्न मार्गों पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। कई स्थानों पर बसों और अन्य वाहनों को रोका गया, जबकि पदयात्रा में शामिल होने जा रहे लोगों को हिरासत में लेकर थानों में बैठाया गया। कुछ वाहनों को जब्त किए जाने की भी बात सामने आई है। इसके बावजूद करीब 500 लोग किसी तरह रांची पहुंचने में सफल रहे और आंदोलन में शामिल हुए।

समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि पदयात्रा की सूचना पहले ही प्रशासन को दे दी गई थी। 9 अप्रैल को पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त, 10 अप्रैल को रांची और खूंटी के उपायुक्तों के साथ-साथ मुख्यमंत्री सचिवालय को लिखित जानकारी भेजी गई थी। इसके बाद 30 अप्रैल को रांची प्रशासन ने मार्ग से संबंधित जानकारी मांगी, जिसे भी उपलब्ध करा दिया गया था।

इसके बावजूद वार्ता का कोई अवसर नहीं मिलने से आंदोलनकारियों में गहरी नाराजगी है। अब सभी की नजर आगामी बैठक पर टिकी है, जिसमें आगे के आंदोलन की दिशा तय की जाएगी।

Related Post