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Fri. Apr 24th, 2026

नीमडीह विद्यालय में लोकतांत्रिक प्रक्रिया से गठित हुई बाल संसद, बच्चों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय, नीमडीह में शुक्रवार को नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही बाल संसद का गठन उत्साहपूर्ण माहौल में किया गया। यह प्रक्रिया पूर्णतः लोकतांत्रिक और सर्वसम्मति के आधार पर शिक्षक-शिक्षिकाओं की देखरेख में संपन्न हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, जिम्मेदारी की भावना और लोकतांत्रिक मूल्यों का विकास करना है, ताकि वे विद्यालय के संचालन में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

बाल संसद के गठन के दौरान विद्यार्थियों में काफी उत्साह देखा गया। सभी पदों के लिए नामांकन और चयन की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। इसमें रामसिंह कुंटिया को अध्यक्ष, मंगल सिंह देवगम को उपाध्यक्ष, सुमित्रा बारी को प्रधानमंत्री और सानिया कालुंडिया को उप-प्रधानमंत्री चुना गया। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के लिए अलग-अलग मंत्रियों और उप-मंत्रियों की जिम्मेदारी तय की गई, ताकि विद्यालय के हर क्षेत्र—शिक्षा, अनुशासन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, खेल, संस्कृति और पर्यावरण—का समुचित संचालन हो सके।

शिक्षा मंत्री के रूप में सुखमती कालुंडिया और उप-शिक्षा मंत्री के रूप में शबनम तांती को जिम्मेदारी दी गई, वहीं वित्त व्यवस्था के लिए अलका तांती और मनाचि खंडाइत को क्रमशः वित्त मंत्री और उप-वित्त मंत्री बनाया गया। अनुशासन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, बागवानी और खेल जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी विद्यार्थियों को जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें नेतृत्व का अवसर प्रदान किया गया। सांस्कृतिक, खाद्य, जल प्रबंधन, उपस्थिति, सूचना-संपर्क और सुरक्षा एवं न्याय जैसे विभागों के गठन से यह सुनिश्चित किया गया कि विद्यालय का समग्र विकास हो और छात्र-छात्राएं हर गतिविधि में भागीदारी निभाएं।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक कृष्णा देवगम ने सभी नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों को बैज पहनाकर सम्मानित किया और उन्हें उनके दायित्वों के प्रति सजग रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बाल संसद केवल एक औपचारिक व्यवस्था नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके जरिए बच्चे न केवल अनुशासन और टीमवर्क सीखते हैं, बल्कि भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी आगे बढ़ते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि सभी मिलकर विद्यालय को स्वच्छ, सुंदर और अनुशासित बनाए रखने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बाल संसद के माध्यम से बच्चों को अपनी समस्याएं रखने और उनके समाधान खोजने का अवसर मिलेगा, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं—गंगाराम लागुरी, एलिस बेक, कुंती बोदरा, सुशील कुमार सरदार, कल्पना गोराई, सुकांति गोप और अंजिता सिंकू—की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी शिक्षकों ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अपने-अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया।

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