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Fri. Apr 24th, 2026

सामरसाई गांव में अष्टम प्रहर अखंड हरिनाम संकीर्तन शुरू।

जमशेदपुर /पोटका

झारखंड में यैसा बहुत ही कम गांव मिलेंगे जहाँ अखंड हरिनाम संकीर्तन नहीं होता है।एक समय हरिनाम का प्रचारक चैत्यन्य महाप्रभु झारखंड होते हुए पूरी धाम गए थे।उसी का प्रभाव झारखंड में पड़ा है।हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी जुड़ी पंचायत के अंतर्गत सामरसाई गांव में शुक्रवार 24 अप्रैल 2026 को सुबह अष्टम प्रहर अखंड हरिनाम संकीर्तन का बिधिवत शुरू किया गया।इस अबसर पर साहित्यकार सह समाजसेवी सुनील कुमार दे ने कहा,,,हरिनाम करने का कोई समय और उम्र नहीं होता है।हरिनाम किसी भी अवस्था और परिस्थिति में किया जा सकता है।हरिनाम इस कलियुग में मुक्ति का सरल उपाय है।हरिनाम करने से शरीर और मन दोनों पवित्र होता है।जहाँ पर हरिनाम होता है वहां पर कलि का प्रवेश अधिकार नहीं है।

समाज सेवी कृष्ण गोप ने कहा,,, इस दुनिया से जाने का समय हरिनाम छोड़कर कुछ साथ में नहीं जायेगा। इसलिए हरिनाम करना चाहिए ।हरिनाम संकीर्तन में राधा रानी कीर्तन संप्रदाय कदमा, गौरंग हरिनाम संकीर्तन संप्रदाय मदन साईं, तरुण दास हरिनाम संकीर्तन संप्रदाय कड़ाडूबा , श्याम सुन्दर बालिका हरिनाम संकीर्तन संप्रदाय महुलडीहा, हरिनाम संकीर्तन संप्रदाय पोड़ाडीहा,शिव दुर्गा बालिका कीर्तन संप्रदाय हैंसलबिल आदि भाग लिया।इस अबसर पर कृष्ण गोप, सुनील कुमार दे, निताई महाकुड़,बलराम गोप,सुधीर सरदार,रामकृष्ण सरदार,माणिक लाल प्रामाणिक,खिरोद प्रमाणिक, दीपक प्रामाणिक,शंकर प्रामाणिक,लक्ष्मण प्रामाणिक,शिव शंकर प्रामाणिक,सरोज प्रामाणिक,प्रभाष प्रामाणिक,जनमेजय प्रामाणिक,आनंद प्रामाणिक,राखो हरि प्रामाणिक आदि उपस्थित रहे।

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