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कांके थानेदार के खिलाफ हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट, आदिवासी महिला ने लगाया जमीन पर कब्जा करवाने का आरोप*

रांची :* रांची जिले के कांके थाना क्षेत्र में आदिवासी जमीन विवाद का मामला अब अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। गढ़ हुसिर की रहने वाली सुभाषो देवी ने कांके थाना प्रभारी प्रकाश रजक के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि थाना प्रभारी ने भू-माफियाओं के साथ मिलीभगत कर उनकी पुश्तैनी जमीन पर कब्जा कराने की कोशिश की और उल्टा उन्हें ही पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर परेशान किया जा रहा है।

हाईकोर्ट में दाखिल इस मामले की फाइलिंग संख्या W.P.(Cr.) 5283/2026 बताई गई है। याचिका में अदालत से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

पुश्तैनी जमीन पर कब्जा कराने की कोशिश का आरोप

सुभाषो देवी ने अपनी याचिका में बताया कि मौजा-हुसिर, थाना संख्या-157 के खाता संख्या-58 में दर्ज उनकी पैतृक जमीन है। इसमें प्लॉट संख्या-381 (46 डिसमिल) और प्लॉट संख्या-382 (41 डिसमिल) मिलाकर कुल करीब 87 डिसमिल जमीन शामिल है। उन्होंने कहा कि यह जमीन आरएस खतियान में उनके पूर्वजों के नाम से दर्ज है और आज भी उसी आधार पर लगान की रसीद कटती है। इसके बावजूद कुछ स्थानीय लोग कथित तौर पर फर्जी कागजात बनाकर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि इन लोगों को स्थानीय पुलिस का संरक्षण मिल रहा है, जिसके कारण विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।

*अंचल अधिकारी ने भी जमीन को बताया खतियानी*

मामले में 22 दिसंबर 2025 को कांके अंचल अधिकारी ने पत्र संख्या 1571 (पप) जारी कर स्पष्ट किया था कि मौजा-हुसिर के उक्त प्लॉट याचिकाकर्ता की खातियानी जमीन है। इस पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि कुछ लोगों द्वारा वहां अवैध हस्तक्षेप और कब्जा करने की शिकायत मिली है।

धारा 163 की कार्रवाई खत्म होने के बाद भी जारी विवाद

सुभाषो देवी का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय मामला धारा 163 बीएनएसएस के तहत अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर रांची की अदालत में भेज दिया। इस मामले में वाद संख्या 3532/2025 दर्ज हुआ था, जिसे 22 जनवरी 2026 को समाप्त कर दिया गया। लेकिन इसके बाद भी जमीन को लेकर विवाद खत्म नहीं हुआ।

*निर्माण रोकने और मारपीट का आरोप*

याचिका के अनुसार 26 जनवरी 2026 को सुभाषो देवी अपनी जमीन पर निर्माण कार्य करा रही थीं। उसी दौरान कुछ लोग वहां पहुंचे और काम रुकवा दिया। आरोप है कि इस दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और जातिसूचक गालियां भी दी गईं। घटना के दौरान बीच-बचाव के लिए शाहजहां अंसारी सहित कुछ स्थानीय लोग पहुंचे।

*उल्टा दर्ज कर दी गई एफआईआर*

सुभाषो देवी का कहना है कि उन्होंने इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत पर केस दर्ज करने के बजाय कांके थाना कांड संख्या 23/2026 के तहत उनके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी। उनके मुताबिक इस केस में केवल धारा 303(2) बीएनएन गैर-जमानती है, जबकि बाकी धाराएं जमानती हैं और अधिकतम सजा तीन साल तक की है।

*आधी रात को छापेमारी का आरोप*

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि 19 फरवरी 2026 की रात करीब 12 बजे थाना प्रभारी प्रकाश रजक पुलिस बल के साथ उनके घर छापेमारी करने पहुंचे। सुभाषो देवी का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य उन पर दबाव बनाना और भू-माफियाओं को जमीन कब्जाने में मदद करना है।

हाईकोर्ट से की गई प्रमुख मांगें

याचिकाकर्ता ने झारखंड हाईकोर्ट से कई मांगें रखी हैं। इनमें मुख्य रूप से—

कांके थाना प्रभारी और कथित भू-माफियाओं की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाए।

जांच पूरी होने तक थाना प्रभारी को निलंबित किया जाए।

याचिकाकर्ता और उनकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए पुलिस संरक्षण दिया जाए।

फिलहाल यह मामला अब हाईकोर्ट के समक्ष पहुंच गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत के निर्देश के बाद पूरे प्रकरण में आगे की स्थिति साफ हो सकेगी।

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