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सिविल सर्जन के बिना बेपटरी हुई चाईबासा सदर अस्पताल की व्यवस्था, जमीन पर इलाज कराने को मजबूर मरीज

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य केंद्र चाईबासा सदर अस्पताल इन दिनों बदहाल व्यवस्था का प्रतीक बन गया है। 1 मार्च से सिविल सर्जन का पद खाली होने के बाद से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका सीधा असर दिखाई देने लगा है। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़ रहा है।

भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा जाति मोर्चा के प्रदेश मंत्री हेमंत कुमार केशरी ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की कई गंभीर खामियां सामने आईं। बताया गया कि ओपीडी को नए भवन में स्थानांतरित तो कर दिया गया है, लेकिन वहां पर्याप्त व्यवस्था और समुचित नियोजन नहीं किया गया है।

अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए सीढ़ियां चढ़कर पहले तल तक जाना पड़ रहा है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा माना जाता है। अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी कतार देखी गई। कई मरीज सुबह से ही जांच के इंतजार में बैठे थे, लेकिन डॉक्टर दोपहर करीब एक बजे अस्पताल पहुंचे, जिससे मरीजों को भूखे-प्यासे घंटों इंतजार करना पड़ा।

इमरजेंसी वार्ड की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई। बेड की कमी के कारण कई मरीजों को जमीन पर लेटकर इलाज कराना पड़ रहा है। कुछ मरीजों को फर्श पर ही सलाइन चढ़ाया जा रहा था, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।

स्थिति को और गंभीर बनाते हुए यह भी सामने आया कि जिले के इस प्रमुख सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक में पिछले कई महीनों से रक्त उपलब्ध नहीं है। निबंधन की प्रक्रिया अटकी रहने के कारण मरीजों के परिजनों को खून के लिए जमशेदपुर जाना पड़ रहा है। समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण कई मरीजों की जान जाने की भी बात सामने आई है।

इस संबंध में भाजपा नेता हेमंत कुमार केशरी ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि सिविल सर्जन का पद खाली रहने से अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही हालात में सुधार नहीं हुआ तो भाजपा को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर उपायुक्त को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। वहीं अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन रिसीव नहीं होने के कारण उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।

अस्पताल में दर्द से कराहते और डॉक्टरों का इंतजार करते मरीजों का दृश्य व्यवस्था की पोल खोलता नजर आया। कई मरीज और उनके परिजन परेशान होकर यही कहते सुनाई दिए— “कोई है… हमारी भी सुनिए… क्या चुनाव खत्म होते ही व्यवस्था भी सो गई है?”

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