जमशेदपुर।आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से कोल्हान प्रमंडल के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों को डायन प्रथा, बलि प्रथा और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है। इस अभियान में सामाजिक कार्यकर्ता रूपा देवी ने कहा कि डायन कुप्रथा की जड़ गांवों में सक्रिय तांत्रिक, ओझा और गुणी जैसे लोग हैं, जो अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं। जब तक समाज इन धारणाओं से ऊपर नहीं उठेगा, तब तक इस कुप्रथा का अंत संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं के नाम पर जीव बलि देना महापाप है। परमात्मा भक्ति से प्रसन्न होते हैं, किसी वस्तु या बलि से नहीं। इसलिए समाज को बलि प्रथा और डायन प्रथा जैसी कुरीतियों को त्यागना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि तंत्र-मंत्र का उद्देश्य मानव कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति है, इससे किसी की हत्या या नुकसान नहीं किया जा सकता। इस तरह की बातें केवल अंधविश्वास हैं।
रूपा देवी ने स्वैच्छिक रक्तदान को मानवता की सेवा बताते हुए कहा कि जो लोग नियमित रक्तदान करते हैं, वे कभी हिंसक नहीं हो सकते। उन्होंने बताया कि महिलाएं 120 दिन और पुरुष 90 दिन के अंतराल पर रक्तदान कर सकते हैं। रूपा देवी स्वयं हर वर्ष तीन बार रक्तदान करती हैं और अधिकतम रक्तदान के लिए वर्ष 2024 में झारखंड सरकार द्वारा रांची में सम्मानित भी की जा चुकी हैं।
इस अभियान में उनके पति सुनील आनंद भी साथ हैं। उन्होंने कहा कि समाज में फैले अंधविश्वास को खत्म करने के लिए वैज्ञानिक, व्यावहारिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से लोगों को शिक्षित करना जरूरी है।

