जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने सोमवार को क्षेत्र परिभ्रमण के दौरान मुसाबनी प्रखंड की कुईलीसुता पंचायत अंतर्गत कुईलीसुता गांव पहुंचकर पारंपरिक डोकरा आर्ट से जुड़े कारीगरों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उपायुक्त जमीन पर बैठकर ग्रामीणों और कारीगरों से बातचीत करते नजर आए, जिससे प्रशासन और जनसामान्य के बीच सहज और संवेदनशील संवाद का दृश्य देखने को मिला।
संवाद के दौरान उपायुक्त ने डोकरा कारीगरों से उनकी उत्पादन प्रक्रिया, कच्चे माल की उपलब्धता, विपणन से जुड़ी चुनौतियों और आमदनी से संबंधित समस्याओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा कि डोकरा आर्ट झारखंड की प्राचीन जनजातीय धातु शिल्प कला है, जो न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान है बल्कि आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को भी मजबूती प्रदान करती है। इस कला का संरक्षण और संवर्धन प्रशासन की प्राथमिकता है।
उपायुक्त ने कारीगरों को आश्वस्त किया कि डोकरा उत्पादों को स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के बाजार से जोड़ने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। बाजार की मांग के अनुरूप डिजाइन, फिनिशिंग और पैकेजिंग को बेहतर बनाने के लिए परामर्श और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही डोकरा आर्ट के लिए प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ राज्य में एक्सपोजर विजिट आयोजित कर कारीगरों को आधुनिक विपणन तकनीकों और नवाचार से अवगत कराया जाएगा।
उन्होंने मौके पर उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिया कि जमशेदपुर के साकची में स्थापित ‘विश्वकर्मा प्वाइंट’ में डोकरा कारीगरों को स्थायी स्थान उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे अपने उत्पादों की प्रत्यक्ष बिक्री कर सकें। इससे न केवल कारीगरों की आय बढ़ेगी बल्कि जिले के लोग भी इस पारंपरिक कला से परिचित हो सकेंगे। उपायुक्त ने यह भी कहा कि डोकरा कारीगरों को सरकारी योजनाओं, स्वयं सहायता समूहों, जीआई टैग और ई-मार्केटप्लेस से जोड़कर उनकी आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
इस अवसर पर मुसाबनी के अंचल अधिकारी पवन कुमार, डीपीएम जेएसएलपीएस सुजीत बारी, जिला उद्यमी समन्वयक सहित डोकरा आर्ट से जुड़े कई कारीगर उपस्थित थे।

