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Wed. Mar 4th, 2026

हेमंत सरकार के पूर्व प्रधान सचिव विनय चौबे की गिरफ्तारी: शराब घोटाले में गहराता संकट

जमशेदपुर: झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की गिरफ़्तारी ने प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को राज्य की शराब नीति में कथित अनियमितताओं के चलते भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गिरफ़्तार किया है।

 

विनय चौबे 1999  बैच के आईएएस अधिकारी हैं, झारखंड सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिनमें मुख्यमंत्री के सचिव और वर्तमान में पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव के रूप में सेवाएं शामिल हैं। 

ACB की जांच के अनुसार, चौबे पर आरोप है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट के साथ मिलकर 2022 में झारखंड में नई शराब नीति बनाने में भूमिका निभाई, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। 

 

आख़िर ये हंगामा क्यों बरपा है?”

दरअसल, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने छत्तीसगढ़ में कथित तौर पर हुए 2050 करोड़ रुपये के शराब घोटाले मामले में केस दर्ज किया था. इस मामले में झारखंड के तत्कालीन आबकारी सचिव आईएएस विनोद चौबे और उत्‍पाद विभाग के संयुक्‍त सचिव गजेंद्र सिंह के साथ रायपुर (छत्‍तीसगढ़) के मयेर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर, छत्‍तीसगढ़ के आईएएस अनिल टुटेजा, आईटीएस अफसर अरुणपति त्रिपाठी को आरोपी बनाया गया है।

बता दें कि करीब तीन साल पहले झारखंड सरकार ने अपनी शराब नीति में बदलाव किया था। इस बदलाव में छत्‍तीगसढ़ के आबाकरी अफसरों की मदद ली गई थी। इसके लिए छत्‍तीसगढ़ के अफसरों को राज्‍य सरकार की तरफ से विधिवत भुगतान भी किया गया था। इसके जरिये झारखंड में भी छत्‍तीसगढ़ जैसी शराब नीति लागू की गई थी। इसके बाद से ही शराब नीति को लेकर आरोप लगने शुरू हो गए थे। आरोप लगा कि नकीली होलोग्राम के जरिये बड़े पैमाने पर देशी और विदेशी शराब बेचा गया, जिसका पैसा सरकारी खजाने की बजाय अफसरों की जेब में गया।उस दौरान आईएएस विनय चौबे झारखंड के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के प्रधान सचिव और राज्य के आबकारी सचिव के पद पर तैनात थे. इस मामले में झारखंड के आईएएस विनोद चौबे और उत्‍पाद विभाग के संयुक्‍त सचिव गजेंद्र सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. इसी को लेकर मंगलवार को ईडी ने अधिकारी विनय चौबे और आबकारी अधिकारी गजेंद्र सिंह, झारखंड शराब टेंडर से जुड़ी कई कंपनियों के मालिकों के ठिकानों पर छापेमारी की है.

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