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दीपावली 8 नवंबर को, जानिए लक्ष्मी पूजन का सबसे शुभ समय और पूजा की पूरी विधि

जमशेदपुर। इस वर्ष दीपावली का पावन पर्व रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। विशेष संयोग यह है कि इस बार नरक चतुर्दशी और महालक्ष्मी पूजन दोनों एक ही दिन पड़ रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार दीपावली की अमावस्या तिथि पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और शुभता का वास होता है। गोवर्धन पूजा 10 नवंबर और भाई दूज 11 नवंबर को मनाई जाएगी।

दीपावली के दिन घर की साफ-सफाई और पूजा की तैयारी सुबह से ही शुरू कर देनी चाहिए। मान्यता है कि मां लक्ष्मी स्वच्छ और व्यवस्थित स्थान पर निवास करती हैं। इसलिए पूजा स्थल, मुख्य द्वार, घर के आंगन तथा व्यापारिक प्रतिष्ठान की विशेष सफाई कर वहां दीपक, रंगोली और फूलों से सजावट करनी चाहिए। शाम को घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने के साथ पूजा की तैयारी पूरी की जा सकती है।

लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय

दिल्ली-एनसीआर के पंचांग के अनुसार 8 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा। इस दौरान वृषभ स्थिर लग्न शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक रहेगा। इसलिए गृहस्थों और व्यापारियों के लिए लक्ष्मी-गणेश पूजन का सबसे शुभ समय शाम 5:55 बजे से रात 7:50 बजे तक माना गया है। इस अवधि में पूजा शुरू करना विशेष रूप से शुभ रहेगा। स्थानीय पंचांग के अनुसार शहर-विशेष में मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

लक्ष्मी-गणेश पूजन कैसे करें

सबसे पहले पूजा स्थल को साफ कर चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। साथ में कुबेर जी का पूजन भी किया जा सकता है। पूजा के लिए कलश स्थापित कर उसमें जल, अक्षत, सुपारी और सिक्का रखा जा सकता है। इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान और पूजन करें, क्योंकि किसी भी शुभ कार्य में गणेश पूजन को प्रथम माना गया है।

गणेश पूजन के बाद माता लक्ष्मी का आवाहन कर उन्हें अक्षत, पुष्प, रोली, सिंदूर, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करें। कमल का फूल उपलब्ध हो तो मां लक्ष्मी को अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद लक्ष्मी मंत्र या ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ का जाप करें। व्यापारी अपने प्रतिष्ठान में बही-खाता, तिजोरी और लेखनी का पूजन भी कर सकते हैं।

पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य मिलकर लक्ष्मी-गणेश आरती करें। अंत में घर के प्रत्येक प्रमुख स्थान पर दीपक जलाएं। मुख्य द्वार, पूजा स्थल, रसोई, आंगन और खिड़की के पास दीप रखने की परंपरा है। दीपक जलाते समय सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।

दीपावली पर केवल धन-समृद्धि की कामना ही नहीं, बल्कि घर और समाज में सकारात्मकता, सद्भाव तथा प्रकाश फैलाने का संकल्प भी लेना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से दीपावली अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। पूजा के बाद जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य सहायता देना भी इस पर्व की भावना के अनुरूप माना जाता है।

इस वर्ष दीपावली का पर्व परिवार के साथ श्रद्धा और उल्लास से मनाते हुए शाम 5:55 से रात 7:50 बजे के बीच लक्ष्मी-गणेश पूजन करना सबसे प्रमुख शुभ अवसर रहेगा।

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