जमशेदपुर। विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा और करियर के दायरे से बाहर निकलकर नए शैक्षणिक विकल्पों से परिचित कराने के उद्देश्य से नाम्या स्माइल फाउंडेशन की ओर से शनिवार को होटल रैडिसन में ‘बियॉन्ड बाउंड्रीज’ लिबरल आर्ट्स एंड डिजाइन एजुकेशन कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। फाउंडेशन के संस्थापक कुणाल षाड़ंगी के नेतृत्व में आयोजित इस पूर्णदिवसीय सम्मेलन में जमशेदपुर और आसपास के विद्यालयों के 400 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव राहुल कुमार पुरवार ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर टाटा स्टील के उपाध्यक्ष (कॉर्पोरेट सर्विसेज) डीबी सुंदरा रामम, पूर्वी सिंहभूम के एसएसपी डॉ. एहतेशाम वकारिब और कुणाल षाड़ंगी उपस्थित थे।
सम्मेलन में विद्यार्थियों को लिबरल आर्ट्स, डिजाइन, ह्यूमैनिटीज और रचनात्मक शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध पाठ्यक्रमों तथा करियर की संभावनाओं की जानकारी दी गई। टाटा स्टील के उपाध्यक्ष डीबी सुंदरा रामम ने कहा कि वर्तमान औद्योगिक दौर में केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि रचनात्मकता और बहुआयामी सोच भी जरूरी है। एसएसपी डॉ. एहतेशाम वकारिब ने अपने चिकित्सा शिक्षा से सिविल सेवा तक के सफर का उदाहरण देते हुए कहा कि पढ़ाई का विषय ही भविष्य का करियर निर्धारित नहीं करता।
प्रधान सचिव राहुल कुमार पुरवार ने कहा कि राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यार्थियों को आर्थिक कठिनाइयों से बचाने के लिए छात्रवृत्ति और अन्य अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कॉन्क्लेव में फ्लेम यूनिवर्सिटी, एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, केआईआईटी, अजींक्य डीवाई पाटिल यूनिवर्सिटी, अलार्ड यूनिवर्सिटी और सेंचुरियन यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों को प्रवेश प्रक्रिया और रोजगार की संभावनाओं की जानकारी दी। आरके अग्रवाल, काइंड्रिल के निदेशक इंदरजीत घोष और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका शिप्रा मिश्रा ने भी विचार रखे।
कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि झारखंड के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है। उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराना ही इस पहल का उद्देश्य है।

