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*पूर्व वायुसेना सार्जेंट विकास कुमार : दो दशक की अनुशासित और समर्पित सेवा* *वायुसेना में रहते हुए कारगिल युद्ध के दौरान चेन्नई में लॉजिस्टिक सपोर्ट टीम तथा संसद भवन हमले के बाद जैसलमेर एयरबेस पर निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी*

जमशेदपुर।भारतीय वायुसेना में दो दशकों तक अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण के साथ सेवा देने वाले पूर्व सार्जेंट विकास कुमार ने अपने सैन्य जीवन में देश की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। नवंबर 1998 में भारतीय वायुसेना में सेवा प्रारंभ करने वाले विकास कुमार नवंबर 2018 में सेवानिवृत्त हुए। लगभग 20 वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने देश के अलग-अलग सामरिक एवं महत्वपूर्ण वायुसेना प्रतिष्ठानों में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।विकास कुमार ने पार्ट-2 कोर्स तथा QRT (क्विक रिएक्शन टीम) कोर्स का प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनकी सेवा तैनातियों में पुणे, अंडमान-निकोबार, जामनगर एयरबेस और चाबुआ, असम प्रमुख रहे। अलग-अलग भौगोलिक और परिचालन परिस्थितियों में कार्य करते हुए उन्होंने वायुसेना की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।

उनके सैन्य जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय कारगिल युद्ध के दौरान की तैनाती से जुड़ा रहा। कारगिल संघर्ष के समय वे चेन्नई में लॉजिस्टिक सपोर्ट टीम के साथ तैनात रहे। सैन्य अभियानों में लॉजिस्टिक व्यवस्था का अपना विशेष महत्व होता है। जवानों और सैन्य प्रतिष्ठानों तक आवश्यक सामग्री, संसाधनों तथा सहयोग को समय पर पहुंचाने में लॉजिस्टिक तंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अवधि में विकास कुमार ने अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों के तहत योगदान दिया।इसी प्रकार संसद भवन पर हुए आतंकवादी हमले के बाद की सुरक्षा तैनाती के दौरान उन्हें जैसलमेर एयरबेस पर जिम्मेदारी मिली। संवेदनशील परिस्थितियों में एयरबेस की सुरक्षा और तत्परता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण दायित्व था। इस दौरान भी उन्होंने अपनी भूमिका का निर्वहन किया और आवश्यकता के अनुरूप ड्यूटी निभाई।

सेवा के दौरान उनके योगदान और कार्यकाल की स्मृति में उन्हें ऑपरेशन पराक्रम तथा LSM से संबंधित सम्मान/मेडल प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त उनके सेवा विवरण में “Iseland” नामक मेडल/सम्मान का भी उल्लेख है।लगभग दो दशक की वायुसेना सेवा के बाद नवंबर 2018 में सेवानिवृत्त हुए विकास कुमार आज भी अपने सैन्य अनुभवों और अनुशासन को जीवन की प्रेरणा मानते हैं। सैन्य सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि समयबद्धता, जिम्मेदारी, टीम भावना और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य का प्रशिक्षण भी है। विकास कुमार की सेवा-यात्रा इसी भावना का परिचायक है। अलग-अलग क्षेत्रों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निभाई गई उनकी जिम्मेदारियां भारतीय वायुसेना के उन हजारों कर्मियों की भूमिका को भी रेखांकित करती हैं, जो अग्रिम मोर्चे के साथ-साथ लॉजिस्टिक, सुरक्षा और सहयोगी व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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