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*राजीव कुमार सिंह : मिग-27 के योद्धा, कारगिल युद्ध में निभाई अहम भूमिका*

जमशेदपुर।भारतीय वायुसेना में दो दशक तक सेवा देकर देश की रक्षा में योगदान देने वाले पूर्व वायुसेना कर्मी राजीव कुमार सिंह का सैन्य जीवन अनुशासन, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल रहा है। उन्होंने भारतीय वायुसेना में मिग-27 लड़ाकू विमान से जुड़ी विभिन्न स्क्वाड्रनों में सेवाएं दीं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बने।राजीव कुमार सिंह ने 19 मई 1986 को भारतीय वायुसेना में अपना सेवाकाल शुरू किया। लगभग 20 वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने मिग-27 से संबंधित विभिन्न स्क्वाड्रनों में कार्य किया। उनकी पोस्टिंग मुख्य रूप से पश्चिमी क्षेत्र में रही, जहां उन्होंने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।

उनके सैन्य जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय कारगिल युद्ध से जुड़ा रहा। कारगिल संघर्ष के दौरान भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के तहत दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में दुश्मन के ठिकानों के विरुद्ध महत्वपूर्ण हवाई अभियान चलाए। राजीव कुमार सिंह भी इस चुनौतीपूर्ण दौर में वायुसेना की ऑपरेशनल जिम्मेदारियों का हिस्सा रहे। मिग-27 जैसे लड़ाकू विमानों ने कारगिल क्षेत्र में जमीनी सैनिकों के अभियान को हवाई सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।30 मई 2006 को लगभग 20 वर्ष की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद वे भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए। हालांकि, वर्दी उतरने के साथ उनका कर्मक्षेत्र समाप्त नहीं हुआ। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र में अपनी दूसरी पारी शुरू की और टाटा स्टील से जुड़े। वहां उन्होंने लगभग 13 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।सैन्य सेवा से प्राप्त अनुशासन, समयबद्धता, नेतृत्व क्षमता और संगठनात्मक कार्यशैली ने कॉरपोरेट क्षेत्र में भी उनके काम को नई दिशा दी। इस प्रकार राजीव कुमार सिंह का जीवन सैनिक सेवा से लेकर उद्योग जगत तक निरंतर कर्म और जिम्मेदारी की यात्रा को दर्शाता है।
वर्तमान में वे सहारा सिटी, मानगो, जमशेदपुर में निवास करते हैं। उनका जीवन उन पूर्व सैनिकों की उस परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें देशसेवा की भावना वर्दी के साथ समाप्त नहीं होती, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों के रूप में आगे बढ़ती रहती है।

20 वर्षों की वायुसेना सेवा, मिग-27 से जुड़ा अनुभव, कारगिल युद्ध का प्रत्यक्ष सैन्य अनुभव और इसके बाद टाटा स्टील में 13 वर्षों की सेवा—राजीव कुमार सिंह की यह यात्रा युवा पीढ़ी के लिए अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा है।

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