चाईबासा: ठेका श्रमिकों की समस्याओं, अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी और कर्मचारियों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं को लेकर गुरुवार को किरीबुरू एवं मेघाहातुबुरू में झारखंड मजदूर संघर्ष संघ की बैठक हुई। बैठक में केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडेय ने ठेका श्रमिकों की समस्याओं को लेकर सेल प्रबंधन पर दबाव बनाने की बात कही।
रामा पांडेय ने आरोप लगाया कि ठेका श्रमिकों से कार्य नवीनीकरण (रिन्यू) के नाम पर ठेकेदारों द्वारा कथित रूप से पैसे लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के इस तरह के शोषण को रोकने के लिए सेल प्रबंधन से बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में वे किरीबुरू और मेघाहातुबुरू में नियमित रूप से डेरा डालकर श्रमिकों की समस्याएं सुनेंगे। इसके लिए दोनों खदानों के यूनियन कार्यालयों को जल्द व्यवस्थित करने की बात कही गई।
उन्होंने कहा कि हर सप्ताह, 15 दिन या जरूरत के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व दोनों खदानों में पहुंचेगा और श्रमिकों की समस्याओं पर चर्चा कर आंदोलन की रणनीति तैयार करेगा।
अस्पताल की व्यवस्था पर रामा पांडेय ने कहा कि चिकित्सकों की कमी के कारण कर्मचारियों और उनके परिजनों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था की कमी का सबसे अधिक असर महिलाओं पर पड़ रहा है। यदि महिलाएं साथ आती हैं तो अस्पताल की समस्याओं को लेकर धरना देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को रेफरल की सुविधा उनका अधिकार है। इसे किसी अधिकारी की इच्छा के आधार पर रोका नहीं जा सकता। अस्पताल से संबंधित लगातार शिकायतें मिल रही हैं। सेल प्रबंधन के साथ वार्ता कर समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। समाधान नहीं होने पर दोनों खदानों में चक्का जाम करने की चेतावनी दी।
रामा पांडेय ने कहा कि चारों खदानों से निकलने वाले लौह अयस्क से संयंत्र की चिमनी चल रही है। यदि श्रमिकों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा और ऐसी स्थिति पैदा होगी कि संयंत्र की चिमनी का धुआं बंद हो जाए।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अधिकार अधिकारियों की इच्छा पर नहीं चलेंगे। नियम-कानून और नीतियां कर्मचारियों की सुविधा के लिए बनाई गई हैं। इन्हें बंद कर कर्मचारियों को गुलाम बनाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किरीबुरू और मेघाहातुबुरू को गुवा जैसी स्थिति में पहुंचाने का प्रयास नहीं किया जाए।
बैठक में दोनों खदानों के महामंत्री सहित किरीबुरू और मेघाहातुबुरू के सैकड़ों सदस्य मौजूद थे।

