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*वारंग क्षिति लिपि के जनक पंडित लाखो बोदरा जयंती की तैयारियां तेज, बड़कुंवर गागराई ने पंडाल निर्माण का लिया जायजा*

चाईबासा: आदिवासी हो समाज के महान शिक्षाविद् और वारंग क्षिति लिपि के जनक पंडित लाखो बोदरा की जयंती को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। चाईबासा के सदर प्रखंड अंतर्गत पुराना चाईबासा में 19 सितंबर को पंडित लाखो बोदरा की जयंती मनाई जाएगी, जबकि 20 सितंबर को मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर आयोजन समिति और ग्रामीणों की ओर से तैयारियां की जा रही हैं।

इसी क्रम में कार्यक्रम के मुख्य व्यवस्थापक पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई ने शुक्रवार को कार्यक्रम स्थल का दौरा किया, उनके साथ जिला परिषद सदस्य एवं भाजपा की वरिष्ठ नेत्री राजश्री बानरा भी उपस्थित रहीं। उन्होंने वहां बन रहे पंडालों का निरीक्षण किया और निर्माण कार्य की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने आयोजन समिति के सदस्यों से तैयारियों को लेकर चर्चा की तथा कार्यक्रम में आने वाले लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने पेयजल, बैठने और सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

बड़कुंवर गागराई ने कहा कि पंडित लाखो बोदरा का आदिवासी हो समाज के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने वारंग क्षिति लिपि के माध्यम से हो समाज को अपनी भाषा को लिखने-पढ़ने का माध्यम उपलब्ध कराया। इससे समाज की भाषा, संस्कृति और पहचान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण आधार मिला। उन्होंने कहा कि लाखो बोदरा का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनकी जयंती गर्व एवं सम्मान के साथ मनाई जानी चाहिए।

पूर्व मंत्री ने पंडित लाखो बोदरा के योगदान और उनके जीवनी का जिक्र करते हुए कहा कि पंडित लाखो बोदरा का जन्म 19 सितंबर 1919 को पश्चिमी सिंहभूम क्षेत्र में हुआ था। वे शिक्षा, भाषा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय रहे। हो भाषा के लिए उन्होंने वारंग क्षिति लिपि का विकास किया। इस लिपि के माध्यम से हो भाषा को अपनी स्वतंत्र लेखन प्रणाली मिली। उन्होंने समाज में शिक्षा के प्रसार और अपनी भाषा-संस्कृति के संरक्षण पर भी जोर दिया।

आज वारंग क्षिति लिपि आदिवासी हो समाज की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। खासकर युवाओं के लिए लाखो बोदरा का जीवन यह संदेश देता है कि अपनी मातृभाषा, लिपि, इतिहास और संस्कृति को जानना और आगे बढ़ाना समाज की जिम्मेदारी है। जयंती के अवसर पर युवाओं से अपनी भाषा और लिपि सीखने तथा आने वाली पीढ़ियों तक इसे पहुंचाने का आह्वान किया जा रहा है।

बड़कुंवर गागराई ने कहा कि मुख्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। इसलिए आयोजन स्थल पर सभी जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जाएं। इस दौरान आयोजन समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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