चाईबासा: अमेरिका लौटने से पहले कर्नाटक मूल की अमेरिकी पीएचडी शोधार्थी आकांक्षा कुमारी को रविवार को हो कला संगम संस्था में सम्मानित किया गया। हो भाषा साहित्यकार डोबरो बुड़ीउली ने उन्हें साहित्यिक पुस्तकें देकर सम्मानित किया और सकुशल अमेरिका वापसी की कामना की।
डोबरो बुड़ीउली ने आकांक्षा कुमारी को साहित्यिक पुस्तक ‘कोरं 1.0’ तथा ‘कोल्हान में हो राजभाषा की दावेदारी’ का अंग्रेजी में अनुवादित संस्करण प्रदान किया। इस दौरान हो भाषा के लेखक और कवि मौजूद रहे।
आकांक्षा कुमारी ने कहा कि कोल्हान की मिट्टी में संस्कृति आज भी जीवंत है। यहां का जीवन दर्शन और परंपराएं अद्भुत होने के साथ-साथ आध्यात्मिक भी हैं। उन्होंने चाईबासा प्रवास के दौरान मिले सहयोग के लिए डोबरो बुड़ीउली और अन्य लोगों का आभार जताया।
बताया गया कि आकांक्षा कुमारी भारत के कर्नाटक मूल की हैं और अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में पीएचडी शोधार्थी हैं। वह कोल्हान की हो संस्कृति, परंपरा और जीवन दर्शन को समझने के उद्देश्य से अमेरिका से चाईबासा पहुंची थीं।
आकांक्षा कुमारी ने चाईबासा में दो सप्ताह से अधिक समय बिताया। इस दौरान उन्होंने कोल्हान के कई गांवों का दौरा किया और वहां की संस्कृति, परंपराओं तथा ग्रामीण जीवन को करीब से देखा। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी जीवनशैली और सामाजिक परंपराओं को समझने का प्रयास किया। साथ ही विभिन्न गतिविधियों और सांस्कृतिक पहलुओं को वीडियो के माध्यम से रिकॉर्ड भी किया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साहित्यकारों और लेखकों ने कहा कि बाहरी शोधार्थियों का कोल्हान की संस्कृति को समझने के लिए यहां आना क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को व्यापक स्तर पर सामने लाने में मदद करेगा। कार्यक्रम में हो भाषा और साहित्य से जुड़े कई लोग उपस्थित रहे।

