जमशेदपुर: टाटा एजुकेशन एक्सीलेंस प्रोग्राम (TEEP 2.0) के तहत 21वीं सदी के कौशल को बढ़ावा देने की पहल के अंतर्गत टाटा स्टील फाउंडेशन (TSF) के सहयोग से केरला समाजम मॉडल स्कूल (KSMS) में दो दिवसीय ‘जोहाड़ हाट फॉर स्कूल्स’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। ‘सोशल एंड क्रॉस-कल्चरल स्किल्स’ विषय पर आधारित यह कार्यक्रम 20 और 21 अगस्त को KSMS ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ।
कार्यशाला में शहर के 20 स्कूलों से आए 100 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। दो दिनों के दौरान विद्यार्थियों को झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, खान-पान, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय जीवनशैली से परिचित कराया गया। कार्यक्रम में जनजातीय कला और हस्तशिल्प से जुड़े विशेषज्ञों एवं कारीगरों ने विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद किया और उन्हें राज्य की सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण सोहराय कला पर आयोजित अनुभवात्मक सत्र रहा। इस दौरान विद्यार्थियों को झारखंड की पारंपरिक दीवार और फर्श कला के जनजातीय उद्गम, प्रतीकात्मक आकृतियों, प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल और फसल उत्सव में पशु-पक्षियों के महत्व के बारे में बताया गया। विद्यार्थियों ने कला से जुड़े सवाल पूछे और पारंपरिक कला को उसके वास्तविक संदर्भ में समझने का प्रयास किया।
कार्यशाला के दौरान लगाए गए विशेष स्टॉल भी विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। इनमें झारखंड के पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजनों के साथ-साथ प्राकृतिक एवं टिकाऊ सामग्रियों से तैयार किए गए कला और हस्तशिल्प उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इसके अलावा पारंपरिक जड़ी-बूटियों, आदिवासी ज्ञान और पीढ़ियों से चली आ रही स्थानीय उपचार पद्धतियों से जुड़े सत्र भी आयोजित किए गए।
कारीगरों और स्थानीय ज्ञान के जानकारों के साथ सीधे संवाद ने विद्यार्थियों को झारखंड की संस्कृति को केवल किताबों या प्रस्तुतियों के माध्यम से नहीं, बल्कि उसके वास्तविक स्वरूप और उससे जुड़े लोगों के अनुभवों के जरिए समझने का अवसर दिया। आयोजकों के अनुसार, इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों में सामाजिक समझ, सांस्कृतिक संवेदनशीलता, संवाद और विभिन्न समुदायों के प्रति सम्मान जैसे 21वीं सदी के महत्वपूर्ण कौशल विकसित करने में मदद करती हैं।
‘जोहाड़ हाट फॉर स्कूल्स’ के माध्यम से विद्यार्थियों को झारखंड की जीवंत सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ स्थानीय कला, पारंपरिक ज्ञान और टिकाऊ जीवन पद्धतियों के महत्व को समझने का अवसर मिला।

