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चाईबासा में गूंजी ‘बोल बम’ की गूंज, बाल कांवड़ियों ने किया बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक

चाईबासा। सावन की भक्ति और आस्था से चाईबासा का माहौल रविवार को शिवमय हो गया। मारवाड़ी युवा मंच चाईबासा जागृति शाखा की ओर से श्रद्धा और उत्साह के साथ बाल कांवड़ यात्रा निकाली गई। शंभू मंदिर, टुंगरी से शुरू हुई यात्रा बांधपाड़ा स्थित शिव मंदिर पहुंची, जहां नन्हे कांवड़ियों ने बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

करीब 80 बालक-बालिकाओं ने इस धार्मिक यात्रा में हिस्सा लिया। पांच से लगभग 15 वर्ष की उम्र के बच्चे कांवड़ लेकर पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुए। रास्ते भर बच्चों के मुख से निकल रहे ‘बोल बम’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा। पारंपरिक और आकर्षक परिधानों में सजे बच्चों ने सावन की भक्ति और शिव आराधना का विशेष रंग बिखेरा।

शिवालय पहुंचने के बाद बच्चों ने बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और भगवान शिव की पूजा कर परिवार एवं समाज की सुख-शांति की कामना की। आयोजन के दौरान बच्चों में भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिला।

बाल कांवड़ यात्रा में बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार भी दिए गए। सर्वश्रेष्ठ पोशाक, सर्वश्रेष्ठ कांवड़, बेहतर पदयात्रा और सबसे पहले जलाभिषेक करने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया। यात्रा में शामिल सभी बच्चों को विशेष पुरस्कार देकर उनका उत्साह बढ़ाया गया।

मारवाड़ी युवा मंच जागृति शाखा ने धार्मिक आयोजन को संस्कार और शिक्षा से भी जोड़ने का प्रयास किया। बच्चों के बीच कलम, पेंसिल, कॉपी समेत अन्य शैक्षणिक सामग्री का वितरण किया गया। संस्था का मानना है कि धार्मिक संस्कारों के साथ बच्चों को शिक्षा के महत्व से जोड़ना भी जरूरी है, ताकि उनमें आस्था के साथ जिम्मेदारी और सामाजिक चेतना का विकास हो।

शाखा अध्यक्ष चंदा अग्रवाल ने कहा कि बाल कांवड़ यात्रा का उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही भगवान शिव की भक्ति, भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना है। सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की आराधना का विशेष अवसर माना जाता है और बच्चों को इस धार्मिक परंपरा से जोड़कर उनमें अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल धार्मिक आस्था से जोड़ना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उन्हें परिवार, समाज और देश के प्रति अपने दायित्वों का एहसास कराना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ कार्यक्रम में बच्चों को शैक्षणिक सामग्री प्रदान की गई।

चंदा अग्रवाल ने बताया कि बाल कांवड़ यात्रा का आयोजन लगातार दूसरे वर्ष किया गया है। संस्था आगे भी सावन के दौरान ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों को जारी रखने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले सप्ताह में शहर की महिलाओं को जोड़कर भी धार्मिक-सामाजिक आयोजन कराने की योजना पर विचार किया जा रहा है।

कार्यक्रम की सफलता में संयोजिका खुशबू जिंदल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शाखा सचिव रिंकी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष खुशबू दोदराजका, पूनम मोदी, स्वीटी दोदराजका, स्वीटी शर्मा, सरला दोदराजका, संगीता पड़िया समेत संस्था की अन्य सदस्यों ने आयोजन में सक्रिय सहयोग किया। इस अवसर पर धार्मिक संस्थाओं से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

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