चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले में माओवाद विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के तीन सक्रिय सदस्यों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमेटी सदस्य सालुका कायम उर्फ सालुका उर्फ डांगिल उर्फ मारू उर्फ भुवनेश्वर कायम के अलावा दो महिला माओवादी पिंकी और कोदोमुनी कोड़ा शामिल हैं। तीनों के आत्मसमर्पण को कोल्हान में माओवादी संगठन के कमजोर होते नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने आत्मसमर्पण की जानकारी के संबंध में प्रेस को वेट करने और पूछताछ की बात कही है। साथ ही परिस्थितियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रेस के साथ साझा की जाएगी।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले तीनों माओवादियों के खिलाफ कुल 109 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें अकेले जोनल कमेटी सदस्य सालुका कायम के विरुद्ध 96 मामले दर्ज हैं। उस पर सरकार ने 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। वर्षों से वह कोल्हान क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों का प्रमुख संचालक माना जाता रहा है और संगठन के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा का करीबी सहयोगी भी रहा है।
जांच एजेंसियों के अनुसार सालुका कायम कई बड़ी नक्सली घटनाओं का मुख्य साजिशकर्ता और सहभागी रहा है। उसके खिलाफ वर्ष 2018 से 2026 के बीच पुलिस और सुरक्षा बलों पर आईईडी विस्फोट, मुठभेड़, रेलवे ट्रैक उड़ाने, निर्माण कार्यों में आगजनी, ग्रामीणों की हत्या, पुलिस मुखबिरी के आरोप में हत्याएं, अपहरण और लेवी से जुड़े अनेक गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार वह कुल 25 बड़ी नक्सली घटनाओं में प्रत्यक्ष रूप से शामिल रहा है।
उसके खिलाफ दर्ज प्रमुख मामलों में मार्च 2026 में मारंगपोंगा-किनबीर क्षेत्र में मुठभेड़ और आईईडी विस्फोट में कोबरा जवानों के घायल होने की घटना, वर्ष 2025 में जराइकेला क्षेत्र में दो अलग-अलग आईईडी विस्फोट, वर्ष 2023 में टोंटो और गोइलकेरा क्षेत्र में लगातार हुए आईईडी धमाके, झारखंड जगुआर के सब-इंस्पेक्टर अमित तिवारी और आरक्षी गौतम कुमार की शहादत वाली मुठभेड़, विस्फोटक भंडार लूट, वर्ष 2022 में पुलिस मुखबिरी के आरोप में हत्या, मुठभेड़ और कई आईईडी ब्लास्ट, वर्ष 2021 में लांजी जंगल में झारखंड जगुआर के तीन जवानों की शहादत, भारत बंद के दौरान रेलवे ट्रैक उड़ाना, ग्रामीणों की हत्या तथा फॉरेस्ट विभाग की मशीनों में आगजनी जैसी घटनाएं शामिल हैं। इसके अलावा वर्ष 2020 और 2018 में भी अपहरण, हत्या, पुलिस कैंप पर हमला, निर्माण कार्य में लगी मशीनों में आगजनी और ग्रामीणों की हत्या जैसे गंभीर मामलों में उसका नाम दर्ज है।
पुलिस का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और आसपास के क्षेत्रों में चलाए गए लगातार अभियानों, माओवादी नेताओं की गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण की नीति का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में पश्चिमी सिंहभूम के 14 माओवादियों ने भी आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद सालुका कायम समेत तीन और सक्रिय कैडरों का मुख्यधारा में लौटना संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कोल्हान क्षेत्र में माओवादी संगठन का नेटवर्क लगातार सिमट रहा है। आत्मसमर्पण करने वाले तीनों से पूछताछ के आधार पर शेष सक्रिय माओवादियों, उनके ठिकानों, हथियारों के जखीरे और संगठन की रणनीति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की उम्मीद है। पुलिस जल्द ही पूरे मामले का विस्तृत खुलासा करेगी।

