रांची। झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने माओवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक हासिल की है। ऑपरेशन “दौरा पहाड़” के तहत संयुक्त कार्रवाई करते हुए सुरक्षा बलों ने भाकपा (माओवादी) के एकमात्र सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य और कुल 2 करोड़ 20 लाख रुपये के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर उर्फ सुर्निमल को उसके चार सहयोगियों के साथ गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का दावा है कि इस कार्रवाई के बाद झारखंड में माओवादी संगठन का शीर्ष नेतृत्व लगभग समाप्त हो चुका है।
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक के नेतृत्व में झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल लगातार माओवादियों के खिलाफ संयुक्त अभियान चला रहे हैं। इन अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। 21 मई 2026 को झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर भाकपा (माओवादी) के 27 नक्सली कमांडरों और दस्ता सदस्यों ने 18 हथियार और 2,987 गोलियों के साथ आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद 13 जुलाई को 20 लाख रुपये के इनामी शीर्ष कमांडर रविंद्र गंझु की गिरफ्तारी, 17 जुलाई को 25 लाख रुपये के इनामी अजय महतो उर्फ टाइगर की गिरफ्तारी तथा एसीएम बबिता उर्फ अनिता किरकू के आत्मसमर्पण जैसी बड़ी सफलताएं भी पुलिस को मिलीं। इसी क्रम में 28 जुलाई को पुलिस मुख्यालय में 16 अन्य नक्सली कमांडरों और दस्ता सदस्यों ने 11 हथियार तथा 1,562 गोलियों के साथ आत्मसमर्पण किया।
इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए 28 जुलाई को धनबाद जिले के बरवड्डा थाना क्षेत्र के जंगलों में धनबाद और गिरिडीह जिला पुलिस तथा 209 कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन “दौरा पहाड़” चलाया। इस दौरान एकमात्र सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया गया। उस पर झारखंड सरकार ने एक करोड़ रुपये तथा ओडिशा सरकार ने एक करोड़ 20 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। उसके खिलाफ 175 नक्सली मामलों में संलिप्तता दर्ज है।
इस अभियान में मिसिर बेसरा के साथ संगठन का रीजनल कमेटी सदस्य और 15 लाख रुपये का इनामी मेहनत उर्फ मोछु उर्फ विभीषण भी गिरफ्तार हुआ, जिसके खिलाफ 137 मामले दर्ज हैं। इसके अलावा एरिया कमेटी सदस्य गौरव उर्फ बिरेंद्र हांसदा उर्फ सौरभ तथा उनके दो अन्य सहयोगियों को भी सुरक्षा बलों ने दबोच लिया।
गिरफ्तार माओवादियों के कब्जे से तीन अत्याधुनिक एके-47 राइफलें, आठ मैगजीन और 288 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।
झारखंड पुलिस का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व की गिरफ्तारी और लगातार हो रहे आत्मसमर्पण से राज्य में भाकपा (माओवादी) संगठन की कमर टूट चुकी है। पुलिस ने शेष बचे माओवादियों से अपील की है कि वे हिंसा और उग्रवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें तथा झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं।

