जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया का प्रकोप लगातार भयावह होता जा रहा है। पोटका प्रखंड के कोवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत नारदा पंचायत के नारदा गांव में तेज बुखार से पीड़ित 12 वर्षीय बच्ची की संदिग्ध मलेरिया से मौत हो गई। वहीं, मृत बच्ची का पांच वर्षीय भाई ब्रेन मलेरिया से संक्रमित पाया गया है, जिसकी हालत गंभीर बनी हुई है। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में फैल रहे मलेरिया और अंधविश्वास के कारण इलाज में हो रही देरी को उजागर कर दिया है।
मृत बच्ची की पहचान गांव निवासी कोंदा सरदार की 12 वर्षीय पुत्री अनीता सरदार के रूप में हुई है। बताया गया कि वह पिछले कई दिनों से तेज बुखार से पीड़ित थी, लेकिन परिजनों ने बीमारी को सामान्य बुखार या पीलिया समझ लिया। समय पर अस्पताल ले जाने के बजाय घरेलू उपायों और अंधविश्वास के भरोसे रहने के कारण उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए रक्त का नमूना जांच के लिए भेज दिया है।
घटना की सूचना मिलते ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पोटका के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुकांत सीट स्वास्थ्यकर्मियों की टीम के साथ नारदा गांव पहुंचे। टीम ने जब मृतका के घर की जांच की तो पाया कि उसका पांच वर्षीय छोटा भाई अजय सरदार भी कई दिनों से तेज बुखार से पीड़ित है। बच्चे की हालत बेहद गंभीर थी, लेकिन परिजन उसे अस्पताल ले जाने के लिए तैयार नहीं थे। स्वास्थ्यकर्मियों ने काफी देर तक समझाइश दी और कड़ी मशक्कत के बाद बच्चे को इलाज के लिए सीएचसी पोटका लाने में सफलता मिली।
सीएचसी पोटका में जांच के दौरान अजय सरदार ब्रेन मलेरिया (सेरेब्रल मलेरिया) से संक्रमित पाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर भी काफी कम है, जिससे उसकी स्थिति और गंभीर हो गई है। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल, जमशेदपुर रेफर कर दिया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार बच्चे की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि बच्ची की बीमारी की जानकारी न तो गांव की सहिया को दी गई थी और न ही स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना मिली थी। मृतका के पिता मूक-बधिर हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य बीमारी को लेकर भ्रम में रहे। यही वजह रही कि समय रहते मलेरिया की जांच और उपचार नहीं हो सका। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यदि शुरुआती दौर में जांच कराकर इलाज शुरू कर दिया जाता तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नारदा गांव में विशेष स्वास्थ्य अभियान शुरू कर दिया है। गांव में घर-घर जाकर बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान की जा रही है, रक्त के नमूने लिए जा रहे हैं और जरूरतमंद मरीजों को तत्काल दवा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही ग्रामीणों को मलेरिया के लक्षण, बचाव के उपाय और समय पर इलाज कराने के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि तेज बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द, उल्टी या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। अधिकारियों ने कहा कि मलेरिया का समय पर इलाज संभव है, लेकिन अंधविश्वास और लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। पूर्वी सिंहभूम के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे मलेरिया के मामलों को देखते हुए विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी बुखार को हल्के में नहीं लेने की सलाह दी है।

