जमशेदपुर। आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप को लेकर आदिवासी सेंगेल अभियान ने गुरुवार को करनडीह चौक पर विरोध प्रदर्शन किया। अभियान के सदस्यों ने मरांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष फागू बेसरा तथा धाड़ दिशोम माझी परगना महाल के अगुवाओं का पुतला दहन किया। अभियान ने बताया कि झारखंड के अलावा बंगाल, ओडिशा, असम और बिहार में भी इसी मुद्दे को लेकर पुतला दहन किया गया।
आदिवासी सेंगेल अभियान के दिशोम परगना सोनाराम सोरेन ने आरोप लगाया कि फागू बेसरा और संबंधित सामाजिक संगठनों के अगुवा संताल आदिवासी समाज को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गिरिडीह के मधुबन में मरांग बुरू के संरक्षण के नाम पर आयोजित महासम्मेलन के जरिए झामुमो ने अपने राजनीतिक हितों को साधने का प्रयास किया। उनका आरोप है कि झामुमो आदिवासियों की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है।
सोनाराम सोरेन ने कहा कि राजनीतिक दखल के कारण गांवों की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था कमजोर हो रही है। कई जगहों पर एक ही गांव में माझी बाबा के अलग-अलग गुट बनने से सामाजिक विवाद की स्थिति पैदा हो रही है। इससे लोगों को पारंपरिक व्यवस्था के तहत न्याय मिलने में भी परेशानी हो रही है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी सेंगेल अभियान इस कथित राजनीतिक हस्तक्षेप के खिलाफ समाज को जागरूक करने के लिए लगातार सात दिनों तक पुतला दहन करेगा। अभियान का उद्देश्य आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखना है। कार्यक्रम में अभियान के कई नेता और सदस्य मौजूद थे।

