Breaking
Mon. Sep 21st, 2026

*एमएमडीआर की खूबियां बताने गांव-गांव जाएगी भाजपा, पहले कानून का असर स्पष्ट करे : बुधराम लागुरी*

चाईबासा: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू द्वारा एमएमडीआर अधिनियम को लेकर जिलों में जन-जागरूकता अभियान चलाने और गांव-गांव नुक्कड़ सभा आयोजित करने की घोषणा पर झामुमो जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जनता को केवल कानून की खूबियां बताने के बजाय उसके प्रावधानों और झारखंड पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।

बुधराम लागुरी ने कहा कि यदि भाजपा जनता के बीच जाकर एमएमडीआर कानून को समझाना चाहती है, तो उसे पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि संशोधन के बाद खनिज संपदा पर राज्य के अधिकार, राज्य का राजस्व, डीएमएफटी और खनन प्रभावित क्षेत्रों के हित किस तरह सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने कहा कि झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है और यहां की खनिज संपदा राजस्व के साथ-साथ आदिवासी-मूलवासी समाज की जमीन, आजीविका और भविष्य से भी जुड़ी हुई है।

उन्होंने कहा कि भाजपा नेता गांव-गांव नुक्कड़ सभा करें, इसमें किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन इन सभाओं में जनता के सवालों का सीधा जवाब भी दिया जाना चाहिए। झारखंड के खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व और उसके उपयोग को लेकर सरकार तथा राजनीतिक दलों को आंकड़ों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।

बुधराम लागुरी ने कहा कि झामुमो ने एमएमडीआर संशोधन को लेकर अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखा है। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ने 19 सितंबर को राज्यभर में धरना-प्रदर्शन भी किया था। अब भाजपा भी जनता के बीच जा रही है तो दोनों पक्षों के तर्क जनता के सामने रखे जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता तथ्यों को समझकर अपना निर्णय करे।

भाजपा के उस दावे पर भी बुधराम लागुरी ने सवाल उठाया, जिसमें एमएमडीआर संशोधन को राज्यहित में बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्यहित की बात केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि कानून की धाराओं और उसके व्यावहारिक परिणामों में भी दिखाई देनी चाहिए। जनता यह जानना चाहती है कि झारखंड के खनिज संसाधनों से राज्य और खनन प्रभावित लोगों को भविष्य में क्या मिलेगा तथा उनके अधिकारों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

झामुमो जिला प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा अगर गांव-गांव जाकर एमएमडीआर के प्रावधानों पर अपनी बात रखेगी तो झामुमो कार्यकर्ता भी जनता के बीच जाकर पार्टी का पक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित करने के बजाय जल, जंगल, जमीन, खनिज संपदा और राज्य के अधिकारों से जुड़े सवालों पर तथ्य आधारित सार्वजनिक चर्चा होनी चाहिए।

बुधराम लागुरी ने कहा कि जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाने से पहले भाजपा को यह बताना चाहिए कि एमएमडीआर संशोधन से झारखंड के हित किन प्रावधानों के माध्यम से सुरक्षित हैं। उनके अनुसार गांव की जनता अब केवल नारे नहीं, बल्कि स्पष्ट जवाब और दस्तावेजी तथ्य चाहती है।

Related Post