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*ओतगुरू कोल लाको बोदरा जयंती पर पूर्व मंत्री द्वारा युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील, हर वर्ष एक लाख सहयोग की घोषणा*

चाईबासा: पुराना चाईबासा स्थित लुकुलुकुमि माचा में रविवार को आदिवासी हो समाज महासभा जिला समिति के संयोजन में ओतगुरू कोल लाको बोदरा जयंती समारोह-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए और ओतगुरू कोल लाको बोदरा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री सह पूर्व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुंवर गागराई ने ओतगुरू कोल लाको बोदरा के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हो समाज की भाषा, संस्कृति और पहचान को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। वारोङ चिति लिपि के माध्यम से उन्होंने समाज को अपनी भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा दिखाई। उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति और भाषा से जुड़ने के साथ नशे से दूर रहने तथा समाज हित में सकारात्मक कार्य करने की अपील की।

बड़कुंवर गागराई ने कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि ओतगुरू कोल लाको बोदरा जयंती समारोह के आयोजन में वे प्रत्येक वर्ष न्यूनतम एक लाख रुपये का सहयोग देंगे। उन्होंने कहा कि समाज के महापुरुषों और सांस्कृतिक विरासत को याद करने वाले ऐसे आयोजनों को आगे भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

समारोह में बताया गया कि वर्ष 2010 में आदिवासी हो समाज महासभा ने गुरु कोल लाको बोदरा को सर्वसम्मति से ‘ओतगुरू’ घोषित किया था। पिछले 15 वर्षों में उनके जन्मस्थली पासेया गांव से शुरू हुई सांस्कृतिक जागरूकता की यह पहल झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंची। रविवार को महासभा केंद्रीय समिति की ओर से मरणोपरांत ‘ओतगुरू’ पद का सम्मान उनके सुपुत्र विञ विक्रम सादा बोदरा को पांच भद्रानों के हाथों प्रदान किया गया।

समारोह में टाटा स्टील फाउंडेशन, चिल्ड्रेन पार्क पब्लिक स्कूल लुमजुरी, मंझारी और रविन्द्र बाल संस्कार स्कूल आसुरा, झींकपानी को ‘ओतगुरू कोल लाको बोदरा सम्मान’ प्रदान किया गया। व्यक्तिगत सम्मान के तहत हो साहित्यकार एवं लेखक दास राम बारदा, ट्राइबल आइडेंटिटी टीएसएफ के हेड जिरेन जेवियर टोपनो और झारखंड ट्राइबल आइडेंटिटी टीएसएफ के लीडर शिवशंकर काण्डेयोंग को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में पीड़ मानकी दलपत देवगम, मुंडा रामेश्वर सिंह कुन्टिया, केंद्रीय अध्यक्ष कृष्ण चन्द्र बोदरा, उपाध्यक्ष नरेश देवगम, महासचिव तिरिल तिरिया, जिरेन जेवियर टोपनो, शिवशंकर काण्डेयोंग, सुभाष बारी, अपूर्वा आल्डा, मानिष आल्डा, कृष्ण चातर, सिंगा पुरती, पोरेश पाड़ेया, गोपाल बोयपाई और समीर कुमार बानरा सहित बड़ी संख्या में तुरतुङ टीचर्स एवं समाज के लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन ओतगुरू कोल लाको बोदरा के विचारों और उनके सांस्कृतिक योगदान को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।

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