चाईबासा: खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से शनिवार को पश्चिमी सिंहभूम जिले के सभी प्रखंड कार्यालयों में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान पार्टी के विधायक और कार्यकर्ता मौजूद रहे तथा राष्ट्रपति के नाम संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया। झामुमो का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन से खनिज संपदा वाले राज्यों के अधिकार और राजस्व हित प्रभावित हो सकते हैं।
इधर, पूर्व मंत्री सह भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुंवर गागराई ने झामुमो के आंदोलन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस विषय को केवल राजनीतिक विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि कानून के वास्तविक प्रावधानों और उसके संभावित प्रभावों को जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य खनन व्यवस्था को अधिक स्पष्ट और समान बनाना तथा खनिजों के उत्पादन को बढ़ावा देना है।
2026 के संशोधन विधेयक में खनिजयुक्त भूमि के नियमन को भी केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में लाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा राज्यों को खनिज अधिकारों या खनिजयुक्त भूमि पर कर, उपकर या अन्य शुल्क लगाने से रोकने का प्रावधान प्रस्तावित है, जब तक वे केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों और सीमाओं के अनुरूप न हों। विधेयक में पहले से बकाया और वसूल नहीं किए गए ऐसे कुछ शुल्कों को अमान्य मानने का भी प्रावधान है, जबकि पहले से जमा या वसूले गए शुल्क वापस नहीं किए जाएंगे।
गागराई ने कहा कि देश के अलग-अलग खनिज उत्पादक राज्यों में खनन से जुड़े शुल्क और करों की व्यवस्था एक जैसी नहीं है। प्रस्तावित संशोधन में इसी तरह की अलग-अलग दरों और खनन लागत को लेकर केंद्र ने एक समान व्यवस्था की आवश्यकता बताई है। विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि अलग-अलग राज्यों में कई प्रकार के शुल्क और अप्रत्याशित कर लगाने से खनन की लागत बढ़ती है तथा निवेश और खनिज उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
झारखंड की तुलना अन्य खनिज उत्पादक राज्यों से करते हुए गागराई ने कहा कि छत्तीसगढ़, ओडिशा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकार और राजस्व व्यवस्था महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार की खनिज नीति में इन राज्यों में महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की खोज तथा नीलामी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्रीय खनन मंत्रालय के अनुसार झारखंड समेत कई राज्यों में महत्वपूर्ण खनिजों के ब्लॉक नीलामी की प्रक्रिया में शामिल किए गए हैं।
गागराई ने मुख्यमंत्री और झामुमो विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार को केंद्र की योजनाओं और कानूनों से मिलने वाले संभावित लाभों की जानकारी जनता तक पहुंचानी चाहिए। उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों से जुड़े विषय पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय राज्य के राजस्व, रोजगार, स्थानीय लोगों के हित और खनन क्षेत्रों के विकास पर चर्चा होनी चाहिए।
वहीं झामुमो का कहना है कि संशोधन से राज्यों के अधिकार सीमित हो सकते हैं। इस संबंध में विधेयक पर संसदीय शोध संस्था ने भी राज्यों की कर लगाने की शक्तियों और खनिजयुक्त भूमि के नियमन से जुड़े संवैधानिक अधिकारों को विचारणीय मुद्दा बताया है।
धरना-प्रदर्शन के दौरान झामुमो कार्यकर्ताओं ने संशोधन वापस लेने की मांग की और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

